पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • National
  • कॉपीराइट कानून के उल्लंघन पर तीन साल कैद

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

कॉपीराइट कानून के उल्लंघन पर तीन साल कैद

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मैडम क्यूरी ने रेडियम की खोज की। किशोर कुमार ने एक से एक बेहतरीन गीत गाए। किसी ने फिल्म बनाई, किसी ने कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार किए। प्रत्येक व्यक्ति अपनी इन विधाओं को अक्षुण्ण रखना चाहता है। कोई और उसके कार्य की नकल करे, वह ऐसा नहीं चाहता। यह खासियत उसका विशेषाधिकार बन जाता है। कानून द्वारा इन अधिकारों की रक्षा की गई है। यह कानून कॉपीराइट कानून कहा जाता है। भारत में कॉपीराइट कानून 1957 में पारित किया गया और पूरे देश में इसे लागू किया गया।
इस अधिनियम का मूल उद्देश्य कॉपीराइट के मूल स्वामी की बेईमानी से की जाने वाली नकल से रक्षा करना। अवैध लाभ प्राप्त करने की मंशा पर रोक लगाना है। एस.आर. जयलक्ष्मी बनाम मेटा म्यूजिकल केस में मद्रास हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित किया गया कि कॉपीराइट कानून का मूल उद्देश्य, व्यक्ति के कार्य, श्रम एवं कौशल की अन्य व्यक्ति नकल न कर पाए। नकल से रक्षा करना ही इसका मूल अभिप्राय है। एक अन्य फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कॉपीराइट के अधिकारों का अन्य व्यक्तियों द्वारा अप्राधिकृत उपयोग किए जाने पर रोक तथा संरक्षण देना मूल कार्य है।
कॉपीराइट अधिनियम को सफलता से लागू करने हेतु कॉपीराइट बोर्ड एवं कॉपीराइट कार्यालय की स्थापना की गई है। कॉपीराइट कार्यालय, कॉपीराइट रजिस्ट्रार के प्रत्यक्ष नियंत्रण के अधीन रहता है तथा केंद्रीय सरकार के अधीक्षण और निदेशन के अधीन कार्य करता है। केंद्र सरकार कॉपीराइट्स का एक रजिस्ट्रार नियुक्त करती है और वह एक या अधिक कॉपीराइट्स के उप रजिस्ट्रार भी नियुक्त करती है। धारा 11 में एक कॉपीराइट बोर्ड के गठन के बारे में प्रावधान किया गया है। इसमें अध्यक्ष के पद पर एक ऐसा व्यक्ति आसीन होता है जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका हो या जिसमें हाईकोर्ट का न्यायाधीश होने की पात्रता हो।
अधिनियम की धारा 12 में कॉपीराइट बोर्ड की शक्तियों का उल्लेख किया गया है। कॉपीराइट बोर्ड सामान्यत: अधिनियम के तहत मामले की सुनवाई उसी क्षेत्र में करेगा जहां कार्यवाही की शुरुआत में संबंधित व्यक्ति स्वेच्छा से निवास करता है या कारोबार करता है। कॉपीराइट बोर्ड को सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 में विहित सिविल न्यायालय के समान शक्तियां प्राप्त होती हैं। जैसे समन करना, हाजिर कराना, शपथ पर उसकी परीक्षा करना। शपथ-पत्र पर साक्ष्य लेना, साक्षियों व दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना।

कॉपीराइट बोर्ड का कोई भी सदस्य किसी ऐसे मामले की कार्यवाही में भाग नहीं लेगा, जिसमें उसका स्वयं का हित निहित हो। पीठासीन अधिकारी के निर्देशों का पालन नहीं करने पर लोकसेवक की अवमानना के दोषी को दंडित करने का प्रावधान भी किया गया है। कॉपीराइट के स्वामी चाहें, तो कॉपीराइट सोसायटी भी बना सकते हैं। जिसमें कम से कम सात सदस्य हों।
शिकायत कहां करेंगे?
काॅपीराइट उल्लंघन क्या है, यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। बिना अनुमति किसी और के स्वामित्व वाली कृति को प्रकाशित करना, उसका लाभ उठाना। सार्वजनिक स्थानों पर इसे दिखाना आदि। कॉपीराइट के उल्लंघन होने पर नजदीक के थाने में एफआईआर लिखाई जा सकती है और जांच में रजिस्ट्रार कॉपीराइट पूरा सहयोग करता है। धारा 63 के अनुसार कॉपीराइट के जानबूझकर उल्लंघन के लिए दुष्प्रेरणा को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। इसके लिए दोषी को कम से कम 6 माह कारावास एवं 50 हजार रु. के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। अधिकतम तीन वर्ष की जेल और दो लाख रु. तक का जुर्माना हो सकता है। यदि कोई बार-बार ऐसा करता है तो सजा व जुर्माना बढ़ सकता है।
> फैक्ट : कॉपीराइट का विवाद दो लेखकों कृष्णा सोबती व अमृता प्रीतम के बीच 1984 में ‘जिंदगीनामा’ शब्द को लेकर हुआ था।
नंदिता झा
हाईकोर्ट एड्वोकेट, दिल्ली
खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- दिन सामान्य ही व्यतीत होगा। कोई भी काम करने से पहले उसके बारे में गहराई से जानकारी अवश्य लें। मुश्किल समय में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की सलाह तथा सहयोग भी मिलेगा। समाज सेवी संस्थाओं के प्रति ...

    और पढ़ें