पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

गठिया महिलाओं में अधिक क्यों?

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
गठिया रोग को आर्थराइसटिस जरूर कहा जाता है, लेकिन यह उसका सिर्फ एक प्रकार है। इस बीमारी से जनसंख्या के एक प्रतिशत लोग ग्रसित हैं। यह महिलाओं में ज्यादा होती है, लेकिन पुरुष भी इस बीमारी से ग्रसित हैं। इसके कुछ विशेष कारण यहां दिए गए हैं। यह बीमारी मुख्यतः 30 से 50 साल के लोगों में होती है, लेकिन बच्चों एवं वृद्धों को भी हो सकती है। गठिया रोग आॅटोइम्यून है, जबकि मनुष्य को 100 से अधिक ऑटोइम्यून रोग हो सकते हैं।
वर्तमान में गठिया का समय रहते उपचार संभव है, इसलिए इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

हमारा इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक प्रणाली) कोशिकाओं का जोरदार नेटवर्क है, जो बेहद बुनियादी स्तर से अत्यधिक जटिल स्तर तक काम करता है। इस सिस्टम का उद्देश्य हमें बीमारियों से सुरक्षित रखना और यह देखना कि हमारी कोशिकाओं में किसी तरह का संक्रमण न हो। लेकिन कभी-कभार हमारे इस तंत्र में ही कुछ खामियां आ जाती हैं और यह संकेतों को ठीक से समझ नहीं पाता है। नतीजतन हमारा इम्यून सिस्टम अपनी कोशिकाओं को पहचान नहीं पाता है और उन पर ही ‘हमला’ शुरू कर देता है। इससे आॅटोइम्यून जैसे ह्यूमेटॉइड आर्थराइटिस (जोड़ों में सूजन) और सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथमेटोसस (सामान्य भाषा में इसे ‘ल्यूपस’ कहते हैं)। इसमें कनेक्टिव टिश्यूज में सूजन और वैस्क्यूलाइटिस (शरीर की धमनियों में सूजन) होती है।

गठिया की तकलीफ महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन नाम के हॉर्मोन में बदलाव के कारण अधिक होती है। इन हॉर्मोन्स का इम्यून सिस्टम और जोड़ों की सूजन में विशेष योगदान होता है। जो माताएं स्तनपान कराती हैं, उनको गठिया का खतरा कम होता है।

आॅटोइम्यून रोग क्या होते हैं?
मनुष्य को 100 से भी अधिक ऑटोइम्यून रोग हो सकते हैं। इनमें से कुछ कनेक्टिव टिश्यू संबंधित गड़बड़ियां होती हैं। इनका असर जोड़ों, मांसपेशियों, हडि्डयों और कभी- कभी गुर्दांे, फेफड़ों, रक्त धमनियों और मस्तिष्क पर भी पड़ता है। ये रोग तब होते हैं जब सामान्य रूप से शरीर की सुरक्षा करने वाला तंत्र संक्रमण या किसी रोग के कारण शरीर की ही स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है।
आमतौर माना जाता है कि गठिया के लक्षण शरीर में जन्मजात होते हैं, लेकिन वे सुप्त अवस्था में होते हैं। वे वातावरण में मौजूद किसी तत्व या स्थिति से सक्रिय हो जाते हैं।
प्रमुख ऑटोइम्यून रोग कौन से? ह्यूमेटॉइड आर्थराइटिस (गठिया रोग) एक या उससे अधिक जोड़ों में दर्द और सूजन, विशेष तौर पर हाथों और पैरों के छोटे जोड़ों में, जिनमें सुबह उठने के बाद कम से कम 30 मिनट तक अकड़न रहती हो।
एंकिलोसिंग स्पाॅन्डिलाइटिसः सुबह उठने के साथ ही पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है, तो ज्यादा घूमने-फिरने वाली गतिविधियां नहीं करने से आराम मिलता है।
सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथमेटोसस : मुंह में छाले पड़ना, फुुंसी होना, जिसमें गालों पर ‘बटरफ्लाई रैश’ भी शामिल है जो धूप में निकलने पर बढ़ता है व बालों का झड़ना।
सोंग्रेन सिंड्रोम : मुंह और आंख में सूखापन बढ़ना व जबड़ों में सूजन आना।
स्क्लैरोडर्मा : ठंड में हाथों व पैरों की उंगलियों का रंग उतरना (रेनाॅल्ड्स फिनामिना) और चमड़ी का सख्त होना।

गठिया के सामान्य लक्षण :
1. हाथ, पैर, कमर, कंधों, गर्दन के जोड़ों में दर्द, सूजन एवं जकड़न होना।
2. रात में जोड़ों का दर्द बढ़ना एवं सुबह उठने पर आधे घन्टे से ज्यादा जकड़न रहना।
3. दर्द, सूजन एवं अकड़न का आराम करने से बढ़ना एवं काम करने से कम होना।
जोड़ों पर दुष्प्रभाव : जोड़ों की गतिशीलता में रुकावट आना, जोड़ों में विकार, कार्यक्षमता का कम हो जाना, कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना।
शरीर पर दुष्प्रभाव : मुंह एवं आंखों में सूखापन, खून की कमी, वजन घटना, बुखार आना, थकावट, हृदयाघात, हडि्डयों का कमजोर होना।
उपचार का उद्देश्य : वर्तमान समय में गठिया के उपचार का उद्देश्य ट्रीट टू टारगेट है जिसमें टारगेट रेमिशन है। रेमिशन का मतलब बीमारी से मुक्त होना है। गठिया लाइलाज नहीं है। बीमारी में प्रथम वर्ष में उपचार शुरू होने पर बीमारी को पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। इसको ‘विन्डो आॅफ अपॉर्च्युनिटी’ कहते हैं। उपचार द्वारा रोगी को गठिया से होने वाले विकारों से बचा सकते हैं तथा रोगी सामान्य जीवन जी सकता है।
उपचार के प्रकार : डिमार्ड (डिसीज मॉडिफाइंग एंटीह्यूमेटिक ड्रग्स) इन दवाइयों से बीमारी को रोका जा सकता है, इसलिए इन्हें डिसीज़ मॉडिफाइंग एन्टीह्यूमेटिक ड्रग्स कहा जाता है। ये दो प्रकार की होती हैः-

1. कन्वेशनल डिमार्ड (मिथोट्रेक्सेट, हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्विन, सल्फासेलेजिन एवं लेफ्ल्यूनोमाइड): गठिया का पता लगते ही डीमार्ड्स अतिशीघ्र शुरू कर देनी चाहिए। इसमें बीमारी की गंभीरता को देखते हुए मोनोथैरेपी (सिर्फ मिथोट्रेक्सेट) या मल्टीपल काॅम्बिनेशन डीमार्ड्स आरंभ की जाती है। मरीज को नियमित रूप से विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाना चाहिए, जिससे गठिया बीमारी नियंत्रण में हो रही है या नहीं पता लगाया जा सके। मिथोट्रेक्सेट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसको सप्ताह में एक बार ही लिया जाता है। इन दवाइयों में मिथोट्रेक्सेट एंकरशीट मुख्य दवाई है। इसके बिना इलाज अधूरा है। इसकी उपयुक्त मात्रा 15-25 मिलीग्राम सप्ताह में एक बार होती है।

2. बायोलॉजिकल डिमार्ड (इनफ्लिक्सीमैब, एटानेरसेप्ट, एडालिम्यूमैब, रिट्रूक्सीमैब, एबाटासेप्ट): बायोलॉजिकल ट्रीटमेन्ट काफी महंगा होता है, लेकिन अब बहुत सारे बायो-सिमिलर भी उपलब्ध हैं, जो कि रिसर्च दवाइयों से काफी सस्ते हैं और उतने ही कारगर हैं। जब परंपरागत दवाइयों से बीमारी नियंत्रित नहीं होती है, तब ही बायोलॉजिकल दवाइयों का उपयोग किया जाता है।

इलाज को लेकर भ्रांतियां :

1.एन्टी कैंसर ड्रग है- हां, मिथोट्रेक्सेट दवाई कैंसर में उपयोग की जाती है, लेकिन गठिया में इसे बहुत कम मात्रा में उपयोग किया जाता है, यह दवा लम्बे समय तक इस्तेमाल में सुरक्षित है।
2.गठिया दवाइयां हानिकारक हैं- एक तराजू में यदि हम बीमारी की तकलीफ एवं दूसरी तरफ दवाइयों के साइड इफेक्ट देखते हैं, तो बीमारी की तकलीफ कहीं ज्यादा है। बीमारी एवं दवाइयों के प्रभाव मालूम करने के लिए समय-समय पर खून की जांच करवाई जाती है, जिससे इनका सही समय पर निदान किया जा सके। उपचार एवं दवाइयों से होने वाले दुष्प्रभावों से बचने के लिए विशेषज्ञ से नियमित परामर्श लें ।

3. गठिया का इलाज संभव नहीं? - गठिया को भी ब्लड प्रेशर एवं शुगर की बीमारियों की भांति दवाइयों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है और इसका इलाज ताउम्र चलता है।
फैक्ट - गठिया दुनिया में सबसे ज्यादा उत्तरी यूरोप के नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन जैसे देशों में होता है। इसका कारण वहां के लोगों में एचएलए-डीआरए जीन पाई जाती है। वह गठिया का कारण है।
डाॅ. राहुल जैन
गठिया रोग विशेषज्ञ
नारायण मल्टीस्पेश्यिलिटी हाॅस्पिटल, जयपुर
खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव - आज की स्थिति कुछ अनुकूल रहेगी। संतान से संबंधित कोई शुभ सूचना मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। धार्मिक गतिविधियों में समय व्यतीत करने से मानसिक शांति भी बनी रहेगी। नेगेटिव- धन संबंधी किसी भी प्रक...

    और पढ़ें