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संबंधों में शांति और प्रेम अक्षय रहे

8 वर्ष पहले
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आज भी अनेक लोग विवाह के पूर्व लड़के लड़की की पत्रिका मिलवाते हैं और विवाह तिथि के लिए मुहूर्त निकलवाते हैं। दोनों का उद्देश्य एक ही है कि बाद का दांपत्य सुखी रहे। तो इतना करने भर से क्या पति-पत्नी के बीच स्वर्ग उतर आएगा। ये शुभ के प्रति सावधानी है, जो रखनी भी चाहिए, परंतु अशुभ के प्रति असावधानी भी न रखें। परिवार अपने आप में एक अलग संसार है।

इसमें पति-पत्नी के रिश्ते अलग ही धारा में बहते हैं। आज अक्षय तृतीया है। विवाह के लिए यह बिना देखे का शुभ मुहूर्त है। आप भले ही पत्रिका मिलाकर या मुहूर्त देखकर विवाह कर रहे हों, इसमें तो कुदरत अपना काम करेगी, परंतु एक काम पति-पत्नी को स्वयं करना होगा और वह है अपनी-अपनी इच्छा को विलीन कर संयुक्त इच्छा को जन्म दें। अपने लिए जीना छोड़ दें तो यहीं से दूसरे के लिए जीना आरंभ हो जाएगा।

यह रिश्ता अपने लिए अपेक्षा करने से अधिक दूसरे की अपेक्षाएं पूरी करने से सजता है। इसका श्रंगार है मांग-मुक्त हो जाना। इस संबंध के सारे फसाद ही मांग के कारण हैं। दोनों की अपनी-अपनी भावनाएं और विचार हैं। पढ़े-लिखे लोग विचार प्रधान होते हैं।

इस कारण इस रिश्ते में विचार ‘मैं’ के भाव को प्रबल करता है। बुद्धि अपने प्रवाह में दूसरे से टकराती जरूर है। भावना के स्तर पर इस रिश्ते में टकराहट से बचा जा सकता है। इच्छा मुक्ति के लिए भावना सहयोगी तत्व है। अक्षय तृतीया के दिन यह भावना जरूर रखी जाए कि इस दिन बन रहे रिश्ते में दोनों के बीच शांति और प्रेम अक्षय रहे।