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सऊदी अरब में योग को मान्यता देने से मिलता संदेश

नोफ मारवाईऔर राफिया नाज, मुस्लिम योग प्रशिक्षिकाएं हैं। एक सऊदी अरब की हैं और दूसरी भारत कीं।

Danik Bhaskar | Nov 17, 2017, 05:02 AM IST

नोफ मारवाईऔर राफिया नाज, मुस्लिम योग प्रशिक्षिकाएं हैं। एक सऊदी अरब की हैं और दूसरी भारत कीं। नोफ मारवाई के प्रयास से योग को उसके देश में ‘खेल’ के तौर पर आधिकारिक मान्यता मिल जाती है। वहीं, झारखंड में योग सिखाने वाली मुस्लिम युवती राफिया नाज को जान से मारने की धमकी मिलती है, फतवा जारी होता है और उनके घर पर पथराव भी किया जाता है। यह घटना, अगर किसी इस्लामिक देश में घटित होती तो कतई आश्चर्य नहीं होता लेकिन, योग के जनक भारत में राफिया की घटना बताती है कि अभी भी योग के प्रति कुछ कट्‌टरपंथी मुस्लिमों का नज़रिया नहीं बदला है।


सऊदी अरब कुछ समय पहले तक योग को इस्लाम के विरुद्ध मानता था। 27 सितंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखे गए प्रस्ताव पर 47 इस्लामिक देशों सहित कुल 177 देशों की सहमति के बाद ‘योग’ को वैश्विक मान्यता मिली। पाकिस्तान, सऊदी अरब, मलेशिया, लिबिया सहित आठ देशों ने 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने के प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी थीं। इनमें से सऊदी अरब का अब योग को ‘खेल गतिविधि’ का दर्जा देने और लाइसेंस लेकर इसे सिखाने की अनुमति देने का निर्णय अपने आप में क्रांतिकारी है।


युवराज मोहम्मद बिन सलमान के ‘विजन-2030’ के तहत सऊदी अरब में कई अहम बदलाव हो रहे हैं। ‘उदारवादी इस्लाम’ के रास्ते वे देश को आधुनिक बनाना चाहते हैं। इसी क्रम में वहां की महिलाओं की आजादी के लिए हाल में कई फैसले सामने आए हैं। ओलिंपिक खेल में हिस्सा लेने की अनुमति, पहली बार वोट देने और चुनावों में प्रत्याशी बनने और अब ड्राइविंग करने तथा स्टेडियम जाकर मैच देखने की अनुमति का निर्णय महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण के लिए काफी महत्वपूर्ण है। बहरहाल,योग को इस्लाम धर्म की जन्मस्थली सऊदी अरब में मान्यता मिलने से पूरी दुनिया को एक सकारात्मक संदेश मिला है। योग तन और मन को शुद्ध करने की विशिष्ट विधियों का समुच्चय है। योग को किसी मजहब से जोड़कर एक खास दायरे में बांधने की कोशिश की जाए।