Hindi News »Abhivyakti »Hamare Columnists »Others» Shashi Tharoor Article Over Nda Government

एनडीए मंत्रियों पर आचार संहिता लागू क्यों नहीं?

संदर्भ: केंद्र सरकार के चार मंत्रियों का इंडिया फाउंडेशन से जुड़ा होना और कैबिनेट सचिव का मौन

शशि थरूर | Last Modified - Nov 15, 2017, 04:58 AM IST

  • एनडीए मंत्रियों पर आचार संहिता लागू क्यों नहीं?
    +1और स्लाइड देखें
    शशि थरूर (विदेश मामलों की संसदीय समिति के चेयरमैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री)
    जब मुझे अप्रैल 2009 में लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद यूपीए सरकार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था तो मैं संयुक्त राष्ट्र के लंबे कॅरिअर से वहां नहीं आ रहा था। बल्कि निजी जीवन के अल्पकाल के बाद सार्वजनिक क्षेत्र में आया था और उस थोड़े से समय में मैंने कई संस्थाओं में सलाहकार की भूमिका निभाई थी। मैंने विदेश मंत्रालय में राज्यमंत्री का दायित्व संभाला भी नहीं था कि प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुरोध आया कि मैं अपने उक्त सारे दायित्वों व संबंधों की जानकारी दूं।

    मैंने एक मेमो में उन्हें व्यवस्थित रूप से सूचीबद्ध कर कैबिनेट सचिव को भेज दिया। कुल नौ पद थे, ज्यादातर मेरे पूर्ववर्ती अंतरराष्ट्रीय जीवन की विरासत थे। इनमें मेरे अंतिम शिक्षण संस्थान फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज, रेडक्रास की अंतरराष्ट्रीय समिति में मानद सलाहकार, फेलो, न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमेनिटीज और दुबई स्थित इंडियन स्कूल का पैट्रन जैसे पद शामिल थे। कुछ ही दिनों में कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर ने कहा कि मुझे सारे पदों से इस्तीफा देना होगा। चूंकि इन सारे प्रतिष्ठित संस्थानों में मैं बिना मानदेय वाले मानद पदों पर था और उनकी गतिविधियां व सिद्धांत भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप थे तो मैंने जिज्ञासा जाहिर की। कैबिनेट सचिव ने एक दस्तावेज भेजा।
    यह मंत्रिपरिषद के लिए आचार संहिता थी, जिसे दशकों पहले अपनाया गया था- मुझे लगता है 1950 पार के दशक में- और हाल में इसे 1970 के दशक में फिर जारी किया गया था। इस संहिता के तहत मंत्रियों को न सिर्फ उनकी सारी बिज़नेस गतिविधियां छोड़नी होती है (यदि कोई हो तो) बल्कि चैरिटेबल सहित अन्य सारे संस्थानों से संबंध भी खत्म करना होते हैं।

    मैंने बिना किसी आपत्ति के उसे स्वीकार किया पर जिस तरह से संहिता की व्याख्या की गई थी उस पर स्पष्टीकरण मांगा। कैबिनेट सचिव ने स्पष्ट कहा : केवल किसी तरह का संबंध होने के कारण सरकार के किसी मंत्री को किसी संस्था की गतिविधियों से जोड़े जाने का जोखिम नहीं लेना चाहिए। यह सामािजक उद्‌देश्य से काम करने वाली संस्थाओं पर भी लागू होता है, जिनसे सरकार को कोई समस्या नहीं होती। सही भी है कि यदि मैं एक स्कूल का संरक्षक बना तो अन्य स्कूलों से तुलना में पक्षपात का मामला बन सकता है।

    उन्होंने ध्यान दिलाया कि मानद पद भी हो तो संभव है संस्था के लोग काम के लिए चंदा एकत्रित करते हों और मास्टहेड पर मंत्री के नाम का दुरुपयोग संभव है। मसलन, मंत्री वाली संस्था को दान देने के पीछे मंत्री से बदले में कुछ पाने की अपेक्षा हो सकती है। मंत्री इससे इनकार भी कर दें तो भी सिर्फ पद होना ही नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है।
    उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद के सदस्य को हितों के टकराव के संदेह से ऊपर होना चाहिए, फिर चाहे वह कितना ही मामूली क्यों न हो। संहिता के मुख्य प्रावधान अनुच्छेद 3.1 में हैं, जिसमें मंत्री को व्यक्तिगत या परिवार के सदस्य के माध्यम से किसी भी उद्‌देश्य के लिए चंदा स्वीकार करने से रोका गया है।
    हालांकि एक खामी है : मंत्री किसी रजिस्टर्ड सोसायटी या चैरिटेबल संस्था अथवा सरकारी मान्यता प्राप्त संस्था के ऐसे प्रयासों का हिस्सा बन सकता है, जिसे प्रधानमंत्री ने अपवादस्वरूप मंजूरी दी हो। मैंने इसकी मांग नहीं की। साफ था कि डॉ. मनमोहन सिंह के मातहत कैबिनेट सचिव नियमों का कड़ाई से पालन करने वाले थे। मैंने सारी संस्थाओं के सारे पदों से इस्तीफे दे दिए।

    इसीलिए इंडिया फाउंडेशन के बोर्ड पर चार मंत्रियों (निर्मला सीतारमन, सुरेश प्रभु, जयंत सिन्हा और एमजे अकबर) के होने से पैदा विवाद पर मेरी जिज्ञासा जागृत हुई। इस संस्था से सत्तारूढ़ दल के कई दिग्गज जुड़े हैं। मेरी तरह ही फाउंडेशन प्रमुख शौर्य डोभाल ने ध्यान दिलाया कि ये लोग मंत्री बनने के पहले से संस्था से जुड़े हैं लेकिन, उन्हें मेरी तरह त्यागपत्र देने के लिए नहीं कहा गया। मैं इस स्थिति में नहीं हूं कि कैबिनेट सचिव पर सवाल करूं लेकिन, बुनियादी सवाल उठते हैं : क्या प्रधानमंत्री ने इंडिया फाउंडेशन पर बने रहने के लिए मंत्रियों को आचार संहिता से मुक्त रहने के अपवाद को मंजूरी दी है? क्या इसकी खासतौर पर मांग की गई थी और कैबिनेट सचिव के माध्यम से इसकी मंजूरी ली गई? यदि ऐसा नहीं हुआ है तो क्या सरकार ने अपनी ही आचार संहित को त्याग दिया है और किस अधिकार से?
    हितों के टकराव का मुद्‌दा एकदम सरल है। इसकी शास्त्रीय परिभाषा यह है: हितों का टकराव ऐसी परिस्थितियों से पैदा होता है, जिनसे द्वितीयक हितों के कारण प्राथमिक हित के फैसले या कार्रवाइयों के प्रभावित होने का जोखिम निर्मित होता हो।’
    बेशक, किसी भी मंत्री का प्राथमिक हित तो मंत्री के रूप में उसकी जवाबदारियां हैं। केंद्र सरकार के संबंधित मंत्री कह सकते हैं कि इंडिया फाउंडेशन के काम में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे मंत्री के रूप में उनका पेशवर काम प्रभावित हो। लेकिन, मंत्री की मौजूदगी से फाउंडेशन से पड़ने वाले प्रभाव का क्या?

    जब फाउंडेशन फंड इकट्‌ठा करता होगा तो मास्टहेड पर मंत्रियों के नाम होने से क्या दानदाता उससे ज्यादा प्रतिसाद नहीं देंगे, जो वे किसी अन्य फाउंडेशन को देते? जब वे विदेशी मान्यवरों को आमंत्रित करते होंगे तो क्या यह संभव नहीं है कि मंत्रियों की निकटता पाने की संभावना के कारण वे आमंत्रण स्वीकार करते होंगे? क्या उन मंत्रियों के जुड़े होने के कारण इस तरह फायदा लेना फाउंडेशन के लिए नैतिक रूप से उचित है, जिन्हें भारतीय करदाता वेतन देते हैं? डॉ. मनमोहन सिंह और उनके कैबिनेट सचिव के पास एक तरह का उत्तर था और ऐसा प्रतीत होता है कि मोदी और उनके प्रधानमंत्री कार्यालय के पास दूसरे तरह का उत्तर है।

    एक ऐसे देश में जहां हम पर करोड़ों के घोटालों का मुद्‌दा हावी रहता है, इस तरह के नैतिकता के विवाद दुर्लभ ही हैं। लेकिन, ऐसी राजनीतिक व्यवस्था में जहां मानकों को कायम रखने की शिद्‌दत से जरूरत हो तो इस मुद्‌दे का सामना करना ठीक ही होगा। मंत्रियों की आचार संहिता को बदला नहीं गया है; यह अब भी गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर है। फिर क्या इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए?
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)
    शशि थरूर
    विदेश मामलों की संसदीय समिति के चेयरमैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री
    Twitter@ShashiTharoor
  • एनडीए मंत्रियों पर आचार संहिता लागू क्यों नहीं?
    +1और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
India Result 2018: Check BSEB 10th Result, BSEB 12th Result, RBSE 10th Result, RBSE 12th Result, UK Board 10th Result, UK Board 12th Result, JAC 10th Result, JAC 12th Result, CBSE 10th Result, CBSE 12th Result, Maharashtra Board SSC Result and Maharashtra Board HSC Result Online

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Shashi Tharoor Article Over Nda Government
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Others

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×