इसी पल में छिपा है आपके शानदार भविष्य का राज

5 वर्ष पहले
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सफल और  खुश लोग अपनी जिंदगी और अपने अनुभवों को भिन्न दृष्टिकोण से देखते हैं। जब वे किसी अंधेरी सुरंग में चले जाते हैं और कुछ दूर जाकर उन्हें अहसास होता है कि उन्हें कोई रोशनी नज़र नहीं आ रही है तो उनके सामने दो विकल्प होते हैं- एक तो बैठ जाएं और शिकायत करने लगें अथवा आगे की ओर बढ़ते जाएं। वे दूसरा विकल्प चुनते हैं।
 
विचार आपकी असलियत को साकार करने की ओर पहला कदम है। अभी, इस पल आप कुछ कर सकते हैं। अभी इस पल आप सोच सकते हैं और उसके मुताबिक कदम उठा सकते हैं। अपनी सोच को अमल में ला सकते हैं और उसे हासिल कर सकते हैं।

आपकी एकमात्र वास्तविकता आपका वर्तमान है। यह जो पल आपके सामने है, बस यही आपके पास है। खुद से पूछकर देखिए कि आप इस पल क्या कर रहे हैं। क्या आप ऐसा कुछ कर रहे हैं, जिससे आपको आगे बढ़ने में मदद मिल रही है? क्या आप ऐसा कुछ कर रहे हैं, जो आपको अपने लक्ष्य की ओर ले जा रहा है? क्या ऐसा कुछ कर रहे हैं जो आपको प्रसन्नता दे रहा है।

कई लोग भूतकाल में  ही रहते हैं। उससे बाहर ही नहीं आते। इसका मतलब है कि वे भूतकाल के बारे में सोचते हुए वर्तमान बीता रहे हैं। उनके सामने मौजूद वक्त को खर्च कर रहे हैं। यदि आप मन की आंखों से किसी बुरे (अथवा अच्छे) अनुभव को देख रहे हैं, उसे कल्पना में साकार कर रहे हैं, जो भूतकाल में आपने जिया था तो क्या यह ऐसा दृश्य है, जो आपको आगे  ले जा रहा है? बुद्ध ने कहा है कि भूतकाल में मत रहो। वर्तमान में, इस पल पर अपना ध्यान केंद्रित करो। मेरी भूतकाल की  उपलब्धियों ने मेरा वर्तमान बनाया है। लेकिन, सच यह है कि यह मेरा भविष्य बनाने के लिए कारगर साबित नहीं होगा। यदि हम उलटी दिशा से सोचंे तो मेरी नाकामियों ने मेरा वर्तमान निर्मित किया है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि मैं भविष्य में भी उसकी तकलीफें झेलता रहूं। मुझे तो आज ऐसा कुछ बदलना है, जो मेरी आज की दशा के लिए जिम्मेदार है।

मैंने देखा है कि कई लोग ‘भाग्य’ को उनकी खराब हालत के लिए दोष देते हैं और वे शिकायत करते रहते हैं उसके बारे में जो उन्हें अब तक भुगतना पड़ा है। वे यह नहीं समझ पाते कि वे भूतकाल के बारे में सोचकर और बोलकर अपना वर्तमान बर्बाद कर रहे हैं। सफल और  खुश लोग अपनी जिंदगी और अपने अनुभवों को भिन्न दृष्टिकोण से देखते हैं। जब वे किसी अंधेरी सुरंग में प्रवेश कर जाते हैं और कुछ दूर जाकर उन्हें अहसास होता है कि उन्हें कोई रोशनी नज़र नहीं आ रही है। तो उनके सामने दो विकल्प होते हैं- एक तो बैठ जाएं और शिकायत करने लगें अथवा आगे की ओर बढ़ते जाएं। वे दूसरा विकल्प चुनते हैं। वे पीछे मुड़कर उसके बारे में सोचते नहीं रहते। भूतकाल में जो कुछ भी हुआ वे उससे सीखते हैं। इस सीख को वे वर्तमान पर लगाते हैं और शानदार भविष्य निर्मित करते हैं। जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने कहा है कि भूतकाल की यादों के कारण हम बुद्धिमान नहीं बने हैं बल्कि भविष्य की हमारी जिम्मेदारी के कारण एेसा हुआ है।

यदि आप किसी नौका पर सवार हैं और बैठकर भूतकाल के बारे में सोचें तो नौका नहीं चलेगी। आप अपने लक्ष्य की ओर नौका खेना शुरू कर दें। आप अपने वर्तमान का इस्तेमाल करें और जो भविष्य चाहते हैं, उसकी ओर बढ़ जाएं। विचार ही वह औजार है, जो आपको आगे ले जाएगा लेकिन, सकारात्मक दृष्टिकोण जरूरी है। जंगल में कोई हिरन खुद शेर की मांद में नहीं पहुंचता उसे शिकार करना पड़ता है।इसी तरह हमें भी योजना को अमल में लाना होगा।
 

जुबिन राशिद
ऑथर और कॉर्पोरेट ट्रेनर
zr@zubinrashid.comcom
 
 
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