जीने की राह

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तीन पंखों की उड़ान पहुंचाती है ऊंचाई पर

केवल लंबी छलांग से जीवन में सफलता नहीं मिलती। उसके लिए एक उड़ान भी जरूरी है।

Danik Bhaskar

Nov 25, 2017, 08:41 AM IST

केवल लंबी छलांग से जीवन में सफलता नहीं मिलती। उसके लिए एक उड़ान भी जरूरी है। उड़ान का मतलब परिंदों से अच्छा और कौन समझ सकता है। लेकिन बहुत ऊंची उड़ान भरने वाले परिंदे भी यह नहीं जान पाते हैं कि उड़ान के लिए दो पंखों की जरूरत होती है। पक्षी तो केवल उड़ना जानते हैं। उनके लिए वह जीवन की एक ऐसी क्रिया है, जो पुरखे उन्हें सिखा गए। लेकिन, मनुष्य उड़ान को ठीक से समझ सकता है। उड़ान का मतलब समझ लें तो यह पता चल जाएगा कि पक्षी भले ही दो पंख से उड़ लें पर मनुष्य को उड़ने के लिए तीन पंख लगेंगे और ये हैं- ज्ञान, कर्म और उपासना के। जब उड़ान ले रहे होते हैं तो सबसे बड़ी बाधा हमारे दुर्गुण ही बनते हैं। इन्हीं दुर्गुणोंं से निपटने के लिए पंख गति के भी काम आते हैं और हथियार बनकर सुरक्षा के भी। जटायु ने अपने पंखों को शस्त्र बनाते हुए ही रावण से टक्कर ली थी। जीवन की कुछ यात्राएं ऐसी हैं, जहां किसी एक पंख के सहारे नहीं जाया जा सकता। हमारे पास ज्ञान, कर्म और उपासना रूपी पंख हैं और ज़िंदगी की उड़ान में इन तीनों की जरूरत पड़ेगी। जो केवल ज्ञान मार्ग से चलेंगे वे बाकी दो चीजें यानी कर्म और उपासना का मतलब नहीं समझ पाएंगे और उनका ज्ञान अधूरा रह जाएगा। न तो केवल कर्म से और न केवल उपासना से जीवन की यात्रा पूरी हो सकती है। ज्ञान, कर्म और उपासना के तीनों पंखों से भरी उड़ान उस ऊंचाई पर पहुंचा देगी, जिसे आप छूना चाहते हैं।


पं. विजयशंकर मेहता
humarehanuman@gmail.com

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