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क्षमता से ज्यादा इस्तेमाल हो चुकीं पटरियों से उतरती ट्रेन

वास्को डिगामा एक्सप्रेस के बांदा के चित्रकूट में पटरी से उतरने की घटना रेलवे की ढांचागत स्थितियों पर कठोर टिप्पणी है।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 25, 2017, 08:36 AM IST

वास्को डिगामा एक्सप्रेस के बांदा के चित्रकूट में पटरी से उतरने की घटना रेलवे की ढांचागत स्थितियों पर कठोर टिप्पणी है। गनीमत है कि इस बार तीन लोगों की जान गई है वरना 13 डिब्बों के उतरने के कारण और ज्यादा जनहानि हो सकती थी। केंद्र और राज्य सरकारों ने मरने वालों के लिए अनुग्रह राशि की घोषणा कर अपनी जिम्मेदारी को समाप्त मान लिया है। जबकि हकीकत यह है कि 2016-17 में ट्रेनों के पटरी से उतरने के 78 हादसे हो चुके तथा और भी हो रहे हैं। रेलवे के पचास प्रतिशत से ज्यादा हादसे गाड़ियों के पटरी से उतरने के कारण होते हैं। 2017 के पहले छह महीनों में 29 हादसे हुए थे, जिनमें 20 यानी 69 प्रतिशत हादसे ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण हुए।

एक दशक के रेल हादसों के इतिहास में यह औसत 51 प्रतिशत का है। दस सालों में हुए 1,394 हादसों में 708 हादसे ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण ही हुए, जिनमें 458 लोगों की जानें गई हैं। पिछले दिनों मुजफ्फरनगर में भी बीस लोगों की जान लेने वाला हादसा भी पटरी से ट्रेन उतरने के कारण ही हुआ था, जिसके बाद रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने इस्तीफा दिया था। पटरियों के अतिरिक्त इस्तेमाल और रेल के ढांचागत विकास में कम निवेश के कारण पटरियों की स्थिति बिगड़ती है और हादसे होते हैं। सरकार को बुलेट ट्रेन के बहाने प्रचार पाना ज्यादा जरूरी है न कि उन रेल लाइनों को सुधारना जिन पर देश की बड़ी आबादी सफर करती है। भारतीय रेलवे की 40 प्रतिशत से ज्यादा लाइनें क्षमता से ज्यादा प्रयुक्त हो चुकी हैं।

ऐसे में बड़ी चुनौती पटरियों को बदलने और उनके आधार व कसाव को मजबूती देने की है। साथ ही अन्य पटरियों की व्यवस्था भी करनी है, ताकि किसी एक लाइन पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। यह सब काम निवेश से तो होगा ही, लेकिन इसके लिए क्षमता का प्रदर्शन भी करना होगा। पिछले दिनों रेलवे ने मुंबई का फुटओवर ब्रिज सेना के सहयोग से बनवाया था तो बड़ी आचोलना हुई थी। इसलिए भले ही रेलवे ने पांच वर्षो में 142 अरब डॉलर के निवेश से ढांचागत विकास की योजना बनाई है, लेकिन उसकी सार्थकता तभी होगी, जब उसे इस्तेमाल करने वाले कुशल हाथ हों। हमारे पांच साल जितना रेलवे निवेश एक साल में करने वाले चीन का मुकाबला सिर्फ अंतरराष्ट्रीय गोलबंदी से ही नहीं होगा बल्कि उसके लिए तेजी से आधारभूत क्षमताओं का विकास करना होगा।

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Web Title: ksmtaa se jyada istemaal ho chukin ptriyon se utrti tren
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