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स्वच्छता सचिव के अनुसरण से ही आएगी स्वच्छता क्रांति / स्वच्छता सचिव के अनुसरण से ही आएगी स्वच्छता क्रांति

डॉ. बाबासाहेब अाम्बेडकर और महात्मा गांधी के बीच भले ही वैचारिक मतभेद रहे हों पर वे इस बात पर एकमत थे।

Feb 25, 2017, 05:16 AM IST
डॉ. बाबासाहेब अाम्बेडकर और महात्मा गांधी के बीच भले ही वैचारिक मतभेद रहे हों पर वे इस बात पर एकमत थे कि छुआछूत खत्म करने के लिए उच्च वर्ग के माने जाने वाले लोगों को वे सारे काम करने चाहिए, जो केवल समाज की पायदान पर तुलनात्मक रूप से नीचे माने जाने वाले वर्ग करते हैं। पिछले हफ्ते, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव, परेश्वरन अय्यर ने भी कुछ ऐसा ही किया– तेलंगाना के वारंगल जिले में अय्यर साहब ने एक टॉयलेट के गड्‌ढे की खुद ही सफाई की।

समाज शास्त्रियों का मानना है कि देश की लगभग आधी आबादी के खुले में टॉयलेट जाने की एक वजह छुआछूत है। गांवों में लोग सोचते हैं कि टॉयलेट का गड्‌ढा सिर्फ समाज की सबसे निचली पायदान पर मौजूद वर्ग के लोग ही साफ कर सकते है। यही नहीं, लोगों को यह भी लगता है कि अन्य जाति का इंसान अगर इस काम को करेगा तो उसे गांव-घर में अस्पर्श्य माना जाएगा। अब चूंकि दलित अधिकारों के लंबे संघर्ष के चलते बहुत से दलितों ने दूसरों का मैला ढोने से मनाकर दिया है, लोग ऐसे टॉयलेट बनवाना चाहते हैं, जिनके गड्‌ढों को ‘कई पीढ़ियों तक साफ न करना पड़े।’ ऐसे टॉयलेट बनवाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान में मिलने वाले 12 हजार रुपए काफी कम साबित होते हैं। इसलिए लोग अक्सर सरकारी दबाव के चलते टॉयलेट बनवा तो लेते हैं, पर उसका इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे में अय्यर साहब का टॉयलेट को खुद साफ करने का यह क्रांतिकारी कदम देश की जनता के शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए संजीवनी साबित हो सकता है।
किंतु इस कदम का कितना प्रभाव होगा ये इस पर भी निर्भर करेगा कि ये प्रयास यहीं नहीं रुके, बल्कि,सारे 125 करोड़ देशवासी अय्यर साहब का अनुकरण करें।
सोच की स्वच्छता का ही दूसरा पहलू यह है कि दिमाग में विचारों से भ्रष्ट समाज हो तो भीतर का यह पहलू बाहर कचरे के रूप में दिखता है। जहां भीतर स्वच्छता होती है, वहां बाहरी स्वच्छता अपने आप दिखने लगती है, यह हम अपने अनुभव से जानते हैं। क्या बाहरी स्वच्छता भी भीतर स्वच्छता लाती है? यह तो स्वच्छता के बढ़ते स्तर के साथ पता चलेगा।
निखिल श्रीवास्तव, 29
रिसर्च मैनेजर, रिसर्च इंस्टिट्यूट
फॉर कम्पैशनेट इकोनोमिक्स
Twitter: @nikkhil_in
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