--Advertisement--

देसी खेती, दुधारू पशुओं के त्याग का नतीजा है प्रदूषण

दो, किसान जो पराली इन दिनों जला रहे हैं, वह भारत की पारम्परिक कृषि में पशुओं के चारे के रूप में उपयोग की जाती थी।

Dainik Bhaskar

Nov 15, 2017, 05:09 AM IST
under 3y column in dainik bhaskar over pollution
राजधानी दिल्ली में धुएं-कोहरे के मिश्रण ने हाहाकार मचा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक शहर के पर्यावरण में हवा की गुणवत्ता ऐसी हो गई है, जो सांस लेने लायक नहीं कही जा सकती। भू-वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो यह मध्य पूर्व से भारत की ओर बहने वाली तेज़ हवाओं के साथ आने वाली धूल का नतीजा है, जो एक वार्षिक चक्र है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में धुंध की गहनता में तेज़ी से बढ़ोतरी तब हुई, जबसे हरियाणा और पंजाब के ज्यादातर हिस्सों में किसान पराली (फसल का अपशिष्ट) बड़े पैमाने पर जलाने लगे हैं। इन्हीं वर्षों में दिल्ली में शहरी प्रदूषण भी तेजी से बढ़ गया। वर्तमान संकट इन तीनों दशाओं के मिश्रण से पैदा हुई स्थिति का परिणाम है।

इस मुद्‌दे पर सभी ओर से चल रही बहस में तीन ज़रूरी बिंदुओं का सम्मिश्रण हमें बेहतर सोच की ओर अग्रसर करेगा। एक, ये नई बात है, जब किसी शहर के पर्यावरण पर गांवों में होने वाली घटना का घातक प्रभाव हो। ऐसा इसलिए कि अब तक संसाधन पूर्ति हेतु ग्रामीण इलाकों की नदियों, कृषिभूमि और दूसरी प्राकृतिक सम्पदाओं पर शहरों की निर्भरता के कारण गांवों पर अधिक दुष्प्रभाव देखा गया है। उदाहरण के तौर पर बेंगलुरू और जयपुर जैसे शहर पेय जल आपूर्ति के लिए सैकड़ों मील दूर कावेरी और चम्बल नदियों पर बने बांधों पर निर्भर है, जिसका सीधा असर उन इलाकों के किसानों पर पड़ता है।

दो, किसान जो पराली इन दिनों जला रहे हैं, वह भारत की पारम्परिक कृषि में पशुओं के चारे के रूप में उपयोग की जाती थी। अब चूंकि फसलें मशीनों की सहायता से काटी जाती हैं तो उनका उस प्रकार उपयोग संभव नहीं रहा। साथ ही दुग्ध उत्पादन चक्र से देशी पशुओं, विशेष रूप से बैलों और गायों के पूरी तरह बाहर हो जाने से भी पराली का उपयोग नहीं बचा।

तीन, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि दिल्ली में जारी आपदा सरकार और नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण पाठ सिखाएगी, क्योंकि भविष्य में आने वाली जलवायु परिवर्तन संबंधी बड़ी समस्याएं इस राज्य या उस राज्य की न होकर सभी को मिलकर समाधान खोजने पर मजबूर करेंगी।
सिद्धांत नौलखा, 28
एलुमनाई ,अजीम प्रेमजी
यूनिवर्सिटी, बेंगलुरू
twitter.com/muteforce
X
under 3y column in dainik bhaskar over pollution
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..