आप ‘लाइट्स’ और ‘कैमरा’ पर ही तो नहीं रुक गए हैं?

5 वर्ष पहले
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जब नदी में पानी की एक बूंद गिरती है तो वह ऐसी तरंगों की रचना करती है, जो सभी दिशाओं में दूर-दूर तक फैल जाती हैं। जब बारिश गिरती है तो लाखों बूंदें, लाखों तरंगें पैदा करती हैं। आपके दिमाग में पैदा होने वाले विचारों का भी आप पर यही प्रभाव पड़ता है। खुशी से भरा दिल पाने के लिए इतना ही काफी है कि अापने में अच्छे विचार पैदा करने और ज़िंदगी को सकारात्मक दृष्टि से देखने की काबिलियत हो। रचनात्मक और उम्मीद से भरा दृष्टिकोण होना बहुत जरूरी है।

याद रखें, भय ही दैत्य है और साहस ही ईश्वर है। नाकामी का भय कई रूपों में अपने आपको व्यक्त करता है। इससे आपके दिमाग में वे नकारात्मक विचार निर्मित होंगे, जो आपकी क्षमता पर संदेह जगाएंगे। दूसरी तरफ थोड़ा-सा साहस भरोसे और आत्मविश्वास की तरंगों का प्रभाव पैदा करेगा। हमेशा  ऐसे लोग होते हैं, जो हमें बताते हैं कि क्यों कोई काम नहीं किया जा सकता और क्यों हम उतने सक्षम या काबिल नहीं हैं। किंतु जब आप खुद में भरोसा करते हैं, तो आप जान जाते हैं कि कुछ भी असंभव नहीं है। मतलब यह नहीं कि इनकार करने वालों से नफरत मत कीजिए। उन्हें प्रेम कीजिए, उनके नकारात्मक शब्दों को सुनिए और जीतने की इच्छा पैदा करने के लिए अधिक साहस जगाइए।

एक फिल्म डायरेक्टर कहता है, ‘लाइट्स, कैमरा, एक्शन!’ आप अपनी ज़िंदगी के डायरेक्टर हैं। क्या आप खुद से वे तीन शब्द कह रहे हैं? ज्यादातर लोग ‘लाइट्स’ और ‘कैमरा’ कहकर रुक जाते हैं। यदि आप ‘एक्शन’ नहीं कहते तो आप आगे नहीं बढ़ेंगे। आपको आइडिएशन से एक्शन की तरफ बढ़ना होगा। यह न कहें कि आप करेंगे- आगे बढ़ें और कर दीजिए। एक कदम बढ़ाना भी तरक्की है। पहला कदम ही सबसे चुनौतीपूर्ण होता है। विजेता समस्याओं को चुनौतियों के रूप में देखते हैं। वे बाधाओं को इस रूप में देखते हैं कि उनसे पार पाना ही होगा। वे रुककर अपने सपने छोड़ नहीं देते। ज़िंदगी में बहुत सारे भटकाव होंगे लेकिन, आपको तो सिर्फ इतना करना है कि अपनी निगाहें लक्ष्य पर रखकर उसकी ओर बढ़ना जारी रखें। सूर्य प्रतिदिन उदित होता है और फिर अस्त हो जाता है। मौसम-चक्र रोज घूमता रहता है। हमारी ज़िंदगी में भी उतार-चढ़ाव आएंगे। जब उतार का वक्त हो तो उम्मीद न छोड़ें। अपने भीतर झांकें और आपको इतनी क्षमता नज़र आएगी, जिसका अब तक उपयोग नहीं हुआ है। उसे बाहर लाइए, जो आपके भीतर छिपा हुआ है। भीतर की इस क्षमता का महत्व समझिए और आप सामने मौजूद कठिन परिस्थितियों को मात देने में सफल हो जाएंगे।

नफरत से भरी इस दुनिया में हम खड़े होकर प्रेम, प्रसन्नता और समृद्धि का प्रसार करने वाला प्रकाश-स्तंभ बन सकते हैं। हम वह सूरज बन सकते हैं,जो धरती को प्रकाश व सकारात्मकता से भर देता है और हर चीज को जीवन देता है। तो अपने आपको नकारात्मक दृष्टिकोण से सीमित मत कीजिए। नफरतों और शिकायतों में जिंदगी बर्बाद मत कीजिए। संदेह के अंधकार में मत भटकिए। नींद से जागिए।  
 
अच्छी सोच
जुबिन राशिद
ऑथर और कॉर्पोरेट ट्रेनर
zr@zubinrashid.com
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