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जानिए हल्दी से जुड़ी ऐसी बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं

हल्दी की छोटी सी गांठ में बड़े गुण होते हैं।

Danik Bhaskar | Mar 11, 2013, 08:31 AM IST

हल्दी की छोटी सी गांठ में बड़े गुण होते हैं। शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां हल्दी का उपयोग न होता हो। पूजा-अर्चना से लेकर पारिवारिक संबंधों की पवित्रता तक में हल्दी का उपयोग होता है। यहां दिए गए फोटो में जानिए हल्दी से जुड़ी खास बातें...

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शास्त्रों के अनुसार पूजन कार्यों में हल्दी का उपयोग काफी महत्वपूर्ण माना गया है। हल्दी के बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जा सकती। इसके अलावा हल्दी का सबसे ज्यादा उपयोग घर के दैनिक भोजन में होता है। हल्दी से भोजन के गुण और स्वाद में इजाफा होता है। स्वास्थ्य के लिए हल्दी रामबाण ही है, कई बीमारियों की रोकथाम के लिए हल्दी का सेवन करना सबसे सरल उपाय है। हल्दी हमारे शरीर में खून को साफ करती है।
 
तंत्र-ज्योतिष में भी हल्दी का महत्वपूर्ण स्थान होता है। तंत्रशास्त्र के अनुसार, बगुलामुखी पीतिमा (बगलामुखी की आभा पीले रंग की मानी गई है, इसी वजह से इन्हें पीतिमा की देवी कहा जाता है।) की देवी हैं। उनके मंत्र का जप पीले वस्त्रों में तथा हल्दी की माला से होता है। इस प्रकार की पूजा से बगलामुखी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्त को सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। शत्रुओं का नाश होता है।
 
हिन्दू धर्म दर्शन में भी हल्दी को पवित्र माना जाता है। ब्राह्मणों में पहना जाने वाला जनेऊ तो बिना हल्दी के रंगे पहना ही नहीं जाता है। जब भी जनेऊ बदला जाता है तो नए जनेऊ को हल्दी से रंगा जाता है इसके बाद ही उसे धारण किया जाता है। हल्दी से जनेऊ रंगने पर वह पवित्र हो जाती है और ब्राह्मण को सभी विपदाओं, नकारात्मक शक्तियों और विचारों से बचाती है। इसमें सब प्रकार के कल्याण की भावना निहित होती है।
 
शारीरिक सौन्दर्य को निखारने में भी हल्दी की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज भी गांवों में नहाने से पहले शरीर पर हल्दी का उबटन लगाने का प्रचलन है। कहते हैं इससे शरीर की कांति बढ़ती है और मांसपेशियों में कसावट आती है। इसके साथ इसका उपयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है। आयुर्वेद में हल्दी को अन्य औषधियों के साथ मिलाकर कई प्रकार की दवाइयां बनाई जाती हैं जिनसे  असाध्य रोगों का भी कारगर इलाज हो जाता है।
 
हल्दी को शुभता का संदेश देने वाला भी माना गया है। आज भी जब कागज पर विवाह का निमंत्रण छपवाकर भेजा जाता है, तब निमंत्रण पत्र के किनारों को हल्दी के रंग से स्पर्श करा दिया जाता है। कहते हैं कि इससे रिश्तों में प्रगाढ़ता आती है। इसके साथ ही निमंत्रण के चावल को हल्दी से रंगकर निमंत्रण पत्र के साथ भेजा जाता है। यह परंपरा काफी प्राचीन समय से चली आ रही है।
 

वैवाहिक कार्यक्रमों में भी हल्दी का उपयोग होता है। दूल्हे व दुल्हन को शादी से पहले हल्दी का उबटन लगाकर वैवाहिक कार्यक्रम पूरे करवाए जाते हैं। हल्दी के उबटन से दूल्हा और दुल्हन की त्वचा में चमक आ जाती है और इसके उपयोग से त्वचा संबंधी रोगों का भी नाश हो जाता है। विवाह पूर्व हल्दी लगाने के पीछे एक कारण यह भी इसके उपयोग  दूल्हा-दुल्हन सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर से बचे रहते हैं। इतने गुणों के कारण ही हल्दी को पवित्र माना जाता है।