17वें करमापा ने भिक्षुणियों को बौद्ध धर्म का भविष्य बताया

6 वर्ष पहले
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गया. कभी भगवान बुद्ध महिलाओं को बौद्ध संघ में शामिल करने के विरोधी रहे व अनिच्छापूर्वक उन्हें बौद्ध संघ में सम्मिलित किया था। लेकिन अब उन्हीं बौद्ध भिक्षुणियां को बौद्ध धर्म का भविष्य व रक्षक के रूप में देखा जा रहा है। 17वें करमापा उज्ञेन थिनले दोरजे ने बोधगया के तेरगर मॉनेस्ट्री में तीसरे आर्य क्षेमा विंटर धर्म प्रवचन के बाद भिक्षुणियों को बौद्ध धर्म के भविष्य के रूप में घोषणा की।
उनकी इस घोषणा के पहले 14वें दलाई लामा ने भी भावी अवतार महिला के रूप में लेने की बात कह सब को चौंकाया था। यह महिला सशक्तिकरण व भिक्षुणियों की अध्ययन और तर्क क्षमता व आत्मविश्वास है, जिसे देखते हुए उक्त बातें कही गई। करमापा तिब्बत के करमा-काग्यू पंथ के बौद्ध अवतारी आध्यात्मिक गुरु माने जाते हैं। भिक्षुणियों को जिन ग्रंथों व शास्त्रों का अध्ययन कराया गया, वे तंत्र से संबंधित हैं। यही कारण है कि कठिन समझे जाने वाले साधना को इन भिक्षुणियों ने सरलता से पूरी कर अपनी मेधा का परिचय दिया, जिससे करमापा प्रभावित हुए।
बौद्ध तंत्र में हैं महिलाएं
तांत्रिक बौद्ध धर्म में शरीर व इंद्रियानुभूति का विशेष महत्व है। यहां शरीर परमानंद का स्थान माना जाता है। तांत्रिक मेल में दो शरीरों की स्थिति आवश्यक मानी जाती है पर यौगिक योग्यता नर में ही रहती है, स्त्री आंतरिक समस्वरता से दूर रहती है। यह संयोग मात्र शारीरिक होता है, भावात्मक नहीं। योगिनी तंत्र, चक्रसंवर, हेवज्रतंत्र, महायोगतंत्र आदि ग्रंथ में इसे स्पष्ट किया गया है।
नर व नारी की एकात्मकता से ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है। इसलिए दोनों देवी-देवता आलिंगन बद्ध रहते हैं। तंत्र का मुख्य काम है, सभी प्रकार के आनंद का रूपांतरण करना। उसकी दृष्टि में सांसारिक भोगोपभोग का आनंद लेते हुए, उससे उत्पन्न शक्ति को आध्यात्मिक जाग्रति में लगा देना। तंत्र में मानसिक विस्तार होता है।
खुलेगा मोनास्टिक कालेज
तीन सप्ताह तक चले प्रवचन व साधना के बाद परमपावन 17वें करमापा ने कहा कि तिब्बत का करमा-काग्यू बौद्ध पंथ कठिन साधना के लिए जाना जाता है। प्रवचन के दौरान कठिन साधना, अध्ययन व तर्क में भिक्षुणियों ने हिस्सा लिया। इस कारण उन्होंने महिला साधकों व भिक्षुणियों के लिए मोनास्टिक कालेज खोले जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे हिमालयी क्षेत्र की बौद्ध महिलाओं व भिक्षुणियों को मदद मिलेगी। इससे उन्हें दायित्व निर्वहन में मदद मिलेगी। करमापा ने भिक्षुणियों से कहा- “आई बीलीव यू आर रेडी’।