गया. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त बीएन सम्पत ने रविवार को गया पहुंचकर अपने पितरों का
पिंडदान किया। देवघाट और अक्षयवट में पिंडदान के पश्चात विष्णुपद मंदिर में पूजा करने के बाद उन्होंने फल्गु नदी में तर्पण किया। अपने पूर्वजों का पिंडदान करने के पश्चात मुख्य चुनाव आयुक्त गया में घंटों रूके।
मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यक्रम की खबर जिला प्रशासन को पहले ही मिल चुकी थी, पर पूरी तरह गोपनीयता बरती गई। मौके पर गया सदर एसडीओ मकसूद आलम व सिटी डीएसपी आलोक कुमार सिंह समेत काफी संख्या में सुरक्षा बल मौजूद थे। पूरे दिन सुरक्षा में लगे अफसर सतर्क रहे।
स्नान व तर्पण के बाद करें गो दान
पितरों के महापर्व के पन्द्रहवें दिन चतुर्दशी तिथि को वैतरणी तालाब में गोदान का क्रम होता है। ब्रह्मा जी ने वैतरणी को गयाधाम पितरों के उद्धार के लिए बुलाया। यह तालाब गया-बोधगया मार्ग पर चांदचैरा से कुछ ही दूर मंगलागौरी द्वार से दक्षिण मार्कण्डेय महादेव के सामने है।
यहां स्नान-तर्पण करने के बाद गौ एवं ब्राह्मण की सविधि पूजन करें। कुछ विद्वानों के अनुसार यहां पार्वण
श्राद्ध एवं पिण्डदान भी है परन्तु मुख्यतः यहां पर गोदान का विधान है। सविधि गोदान करने के बाद दान के सम्पूर्ण फल प्राप्ति के लिए दक्षिणा सुवर्णादि पुरोहित-आचार्य को अर्पण करना चाहिए।
गो-दान के पश्चात पितरों की मुक्ति के लिए मार्कण्डेय महादेव से प्रार्थना करें। यह मंदिर प्राचीन है। बारह वर्ष के आयु वाले मृकण्डु ऋषि के पुत्र मार्कण्डेय ने शिवपूजा करके दीर्घायु होने का वरदान प्राप्त किया था। तत्पश्चात बाईपास मोड़ से पश्चिम पौराणिक कोटेश्वर महादेव का दर्शन करना चाहिए। इनके दर्शन से पितर प्रसन्न होते हैं, और मनुष्य धनी हो जाता है। कुछ ही दूरी पर मधुश्रवा नदी है, यहां तर्पण करने से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
प्रस्तुति: आचार्य नवीन चंद्र मिश्र वैदिक
(पितरों की आत्मा की शांति के लिए गया में पिंडदान करते मुख्य चुनाव आयुक्त)