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डाउनलोड करेंगया. टनकुप्पा प्रखंड के ऐतिहासिक महेर गांव में भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण की मुद्रा में विशाल मूर्ति मिली है। इसे गुप्तकाल के पांचवीं अथवा छठी शताब्दी का माना जा रहा है। बिहार में पहली बार इस तरह की मूर्ति मिली है। नेपाल के कुशीनगर में बुद्ध के महापरिनिर्वाण मुद्रा की पौराणिक मूर्ति है।
डीम्ड विश्वविद्यालय नव नालंदा महाविहार के चार सदस्यीय दल ने इसकी खोज की है। गया जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर पूरब गया- रजौली राष्ट्रीय उच्च पथ पर अवस्थित है महेर गांव। यहां बुद्ध के महापरिनिर्वाण की मिली मूर्ति के तीन और खंडों की भी खोज की जा रही है। सभी खंडों के मिलने के बाद यह मूर्ति करीब छह फीट लंबी, तीन से चार फीट ऊंची और तीन फीट चौड़ी होगी। बिहार में पुरातात्विक अवशेषों का यह अद्भुत नमूना है। इस गांव में पालकालीन (आठवीं से बारहवीं शताब्दी) अमिताभ बुद्ध की भी मूर्ति इसके पूर्व मिली थी।
कई पुरातात्विक अवशेषों के मिलने की संभावना
डीम्ड विश्वविद्यालय नव नालंदा महाविहार का दल प्राचीन मगध में पाये जानेवाले पुरातात्विक अवशेषों को सूचीबद्ध करने का कार्य कर रहा है। इन अवशेषों के पुनरूद्धार कार्यक्रम के तहत यह अभियान चलाया जा रहा है। महेर के आसपास के गांवों में भी कई पुरातात्विक अवशेषों के मिलने की संभावना है।
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