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शराब के धंधेबाजों के खिलाफ फूंका बिगुल

7 वर्ष पहले
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बिहारशरीफ. कमला, सुलेखा, नीलम व अन्य महिलाओं के तमतमाए चेहरों पर गुस्सा व हाथों में झाड़ू देख गांव के पुरुष उनके रास्ते से हटते जा रहे थे। जिसको जहां जगह मिली छिप रहा था। सौ से ज्यादा इन महिलाओं में वैसी महिलाएं शामिल थीं जिनके हाथ उनके मजदूर पति की कमाई के रुपयों बगैर खाली रह जाते थे।

नशे धुत्त उनके पतियों की कमाई शराब के अड्डों पर उड़ जाती थी। ये महिलाएं हिलसा प्रखंड के वंशी बिगहा गांव की थीं। सुबह से ही गांव का माहौल बदला नजर आया। गांव में करीब आधा दर्जन स्थानों पर शराब की भट्ठियां व दुकानें चलती थीं, जिन्हें एकजुट हुईं महिलाओं ने तोड़ डाला।

लाठी-डंडे व झाड़ू लेकर महिलाओं ने शराब के धंधेबाजों को चेताया कि कल से गांव में शराब बिकी तो उनकी खैर नहीं। उनके तेवर देख गांव के शराबियों के होश उड़े रहे। महिलाओं ने उन्हें भी घूम-घूमकर चेतावनी दी, कि अगर दारू को हाथ भी लगाया तो ठीक नहीं होगा।

बीडीओ और दारोगा ने नहीं दिया था ध्यान

गांव की जेठनी देवी, सुलेखा, शोभी, पिंकी आदि का कहना है कि वे पहले बीडीओ और थानेदार से भी मिल चुकी हैं। यह भी बताया कि उन्हें शराब दुकानदारों के बारे में पुख्ता जानकारी दी गई थी, फिर भी उनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इलाके की पुलिस व अफसर शराब कारोबारियों से मिले हुए हैं।

रात में की मीटिंग और सुबह में निकाला जुलूस
महिलाओं का यह गुस्सा रातोंरात भड़का हो, ऐसी बात नहीं। उनके मन में विरोध की चिंगारी तो पहले से ही थी, पर कमी थी तो बस एकजुटता की। अंतत: रात में महिलाओं ने गांव में मीटिंग की और सुबह निकल पड़ीं हाथ में झाड़ू-डंडा लेकर। उनका कहना था कि शराबी पति की मार अब वे नहीं सहेंगी। उन्हें बच्चों का भविष्य भी बनाना है।

दो गांवों से मिली प्रेरणा
वंशी बिगहा नालंदा का तीसरा गांव है। जहां महिलाओं ने शराब कारोबारियों के खिलाफ बिगुल फूंका है। इसके पहले बड़ी घोसी व हरि बिगहा में कुछ इसी तरह महिलाओं ने नशाखोरी के खिलाफ आवाज बुलंद की थी।वहां इसका असर भी दिखा और शराब की बिक्री बंद हुई।