सुपौल. न्यूयॉर्क में 27 सितंबर को ग्लोबल सिटीजन अवार्ड बांटे जाएंगे। अवार्ड के दावेदारों में दो भारतीय भी शामिल हैं। इनमें से एक हैं ह्यूमैन्योर पावर संस्था के अनूप जैन। अनूप और उनकी संस्था को बिहार के सुपौल जिले में टॉयलेट्स बनाने और लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए फाइनल सूची में जगह दी गई है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है, जिन्होंने जैन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ह्यूमैन्योर पावर का दावा है कि सुपौल के गांव में उसने जुलाई 2014 में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। 20 शौचालय बनाए। 17 हजार लोगों ने इसका फायदा उठाया है। लेकिन गांव के लोगों को शौचालय के बारे में पता ही नहीं है। सुखपुर में सिर्फ दो शौचालय हैं। जिसे स्थानीय संस्था दीपज्योति इस्तेमाल करती है।
संस्था का दावा है कि इसमें ह्यूमैन्योर पावर की कोई सहायता नहीं ली गई। जबकि ह्यूमैन्योर ने दीपज्योति को अपना सहयोगी बताया है। इसके सह-संस्थापक चंदन कुमार को भारत में ह्यूमैन्योर पावर का को-डायरेक्टर बताया है। दूसरे गांव निमुआ का भी यही हाल है। यहां बने टॉयलेट्स का इस्तेमाल भी दीपज्योति संस्था के लोग ही कर रहे हैं।
इनोवेशन का दावा भी खोखला
दावा है कि निमुआ में संस्था के पायलट प्रोजेक्ट में बायोगैस प्लांट लगा है। जहां गैस से बिजली पैदा की जाती है। बिजली से पानी साफ करते हैं। जिसे आसपास के इलाकों में सप्लाई किया जाता है। इलाके में बायोगैस प्लांट तो है लेकिन इससे निकली बिजली का इस्तेमाल प्लांट के अंदरुनी जरूरतों के लिए किया जाता है। पानी के सप्लाई की कोई जानकारी आसपास के लोगों को नहीं है।
दावा : सुपौल के सुखपुर व निमुआ गांव में 20 टाॅयलेट बनाए, 17000 लोगों को लाभ
हकीकत : सिर्फ 3 टाॅयलेट, वो भी किसी दूसरी संस्था के, लोग इस्तेमाल भी नहीं करते
>अवार्ड की फाइनल सूची में शामिल हैं अनूप जैन
>27 तारीख को न्यूयॉर्क में दिया जाना है अवार्ड
>ह्यूमैन्योर पावर संस्था चलाते हैं अनूप
>प्रधानमंत्री की मौजूदगी में दिया जाएगा अवार्ड
(अनूप जैन- फाइल फोटो)