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डाउनलोड करेंमधुबनी. भारत-नेपाल सीमा के जयनगर अनुमंडल मुख्यालय से चलनेवाली एकमात्र समझौता नेपाली ट्रेन सेवा ठप होने के कगार पर पहुंच चुकी है। रेलवे के सुरक्षा माप दंड के लिहाज से रेलवे ट्रैक की स्थिति काफी दयनीय है। फिर भी यातायात की सुविधा का ठोस विकल्प न होने के कारण यह सेवा चल रही है। ऐसे में कभी भी दुर्घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
रेलवे ट्रैक की स्थिति काफी दयनीय है। नेपाली रेलवे की पटरी लकड़ी के स्लीपर व स्पाइकर सड़-गल जाने व नैरो गेज की रेल पटरी पुरानी होने की वजह से गर्म हो जाती है, जिसके कारण आये दिन ट्रेन पटरी से उतर जाती है। यहां तक कि कई दिनों तक रेल परिचालन ठप हो जाया करता रहता है। दूसरी ओर इस रेलवे पर चलने वाले इंजन की स्थिति खराब है। इंजन के ड्राईवर रफीक कवारी, विन्देश्वर पासवान, हेम बहादुर की माने तो संचालित इंजन में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण आये दिन इंजन बंद हो जाता है। कई खराब इंजन नेपाल के रेलवे वर्कशाप में पड़े हैं। जो राशि के अभाव में बन नहीं पाये हैं। बोगियों की स्थिति ऐसी है, कि अधिकांश डब्बों की छतें टूटी हुयी है। शौचालय, पेयजल बिजली सुविधा विहीन हैं।
वर्कशॉप में पड़े हैं कई इंजन व बोगियां
भारत सरकार द्वारा 16 वर्ष पूर्व नेपाल-भारत मैत्री सहयोग के तहत नेपाल रेलवे कंपनी लिमिटेड को चार इंजन, 30 नई बोगियां, शौचालय व बिजली की सुविधाएं दी गयी थी। इसमें से तीन इंजन जनकपुर व खजरी स्थित लोकोमोटिव वर्कशॉप में पड़े हैं। नेपाल रेलवे के एसएम खडग़ नारायण चौधरी की मानें, तो पिछले वर्ष नेपाल सरकार ने इस दिशा में मरम्मत के लिए फंड दिया, पर काम के लिहाज से राशि काफी कम थी।
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