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थामी कुदाल तो 113 एकड़ खेत में पहुंचा पानी, मनरेगा को कराया करप्शन फ्री

5 वर्ष पहले
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मुजफ्फरपुर. यह मनरेगा मजदूरों का भागीरथ प्रयास है। मनरेगा में भ्रष्टाचार मिटाने का, जरूरतमंदों को रोजगार दिलाने का और इलाके में खुशहाली लाने का। चार साल पहले कुढ़नी के रतनौली का संजय सहनी दिल्ली में इलेक्ट्रिशियन का काम करता था। काम छोड़ कर मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार मिटाने की ठानी। पहले जरूरतमंदों को रोजगार दिलवाया। फिर नहरों की उड़ाही करने का बीड़ा उठाया ताकि प्रखंड के तीन पंचायतों के 113 एकड़ खेत में सिंचाई के लिए पानी पहुंचे।

कुढ़नी के प्रोग्राम अधिकारी (मनरेगा) जीतेंद्र कुमार की मानें, तो 150 साल बाद हरिशंकर मनियारी में 3300 फीट लंबाई वाली नहर की मजदूरों ने उड़ाही कर खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था कर ली है। रतनौली पंचायत में 7100 फीट लंबाई की चार और छितरौली पंचायत में 4500 फीट लंबाई की 3 नहरों की उड़ाही मनरेगा मजदूरों ने की है। इन तीन पंचायतों के 325 मजदूरों ने औसतन 54 दिनों तक नहरों की उड़ाही की। संजय इन्हीं मजदूरों में से एक हैं और इनका अगुआ भी। वह अब मनरेगा मजदूर कहलाने में गर्व महसूस करते हैं।
लेकिन, यह सब इतना आसान नहीं था। भ्रष्टाचार मिटाने के लक्ष्य में शामिल उनके एक साथी रामकुमार ठाकुर को जान भी गंवानी पड़ी। पेशे से वकील रामकुमार मनरेगा पर आरटीआई के तहत जानकारी मांगते थे। कई गड़बड़ियां भी उजागर की थीं। बताया जाता है कि उनकी हत्या की यही वजह बनी।
संजय ने दिल्ली में पहले कम्प्यूटर सीखा फिर इंटरनेट की मदद से मनरेगा में हो रहे भ्रष्टाचार को जाना। गांव पहुंचकर मनरेगा में हो रहे भ्रष्टाचार के पोषक तत्वों से लोहा लिया। इसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष मैथ्यू और निखिल डे ने उनकी मदद की। चार साल के लंबे संघर्ष के बाद पंचायत को भ्रष्टाचार मुक्त करने में संजय को कामयाबी मिली। कुढ़नी के साथ ही जिले में उसकी पहचान अब मनरेगा वाच से हो रही है। अब इंडिया फ्रेंड एसोसिएशन उसे हर माह 15 हजार रुपये फेलोशिप दे रहा है।
संजय की पहल से आई जागरूकता का ही परिणाम है कि कुढ़नी प्रखंड में जिले के सर्वाधिक 1 लाख 42 हजार 735 मजदूरों को इस साल मनरेगा से रोजगार मिला है। महंत मनियारी के मजदूरों को 9 माह बाद दूसरी पंचायत हरिशंकर मनियारी में काम दिलाया गया। कुढ़नी के 39 में से 12 वैसी पंचायत के मजदूरों को अब रोजगार दिलाने की तैयारी है, जहां के कामगारों को अब तक एक दिन की भी मजदूरी नहीं मिल सकी है।
एक नजर-
- 325 मजदूरों ने कुढ़नी की तीन पंचायतों में औसतन 54 दिनों तक की है नहरों की उड़ाही
- 150 साल बाद कुढ़नी में हरिशंकर मनियारी के 3300 फीट लंबे नहर की हुई उड़ाही
- 113 एकड़ खेतों तक पहुंचाया 8 नहरों से पानी
- 1,42,735 सर्वाधिक मजदूरों को इस साल कुढ़नी प्रखंड में मनरेगा से मिली मजदूरी
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