मुजफ्फरपुर। 'कौन कहता है कि आसमां में सुराग नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों।' आंखो में सपने और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मंजिल कितनी हीं दूर क्यों न हो उस पर सफलता पाई जा सकती है। दुष्यन्त के इस पंक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है मुजफ्फरपुर के बोचहां प्रखण्ड के पटियासा जालान गांव की अनिता ने। गुमनामी कि जिन्दगी बसर करने वाली अनिता आज महिला सशक्तिकरण की एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर है। उनकी सफलता की कहानी कृषक महिलाओं के लिये प्रेरणास्त्रोत है। मधुमक्खी पालन में सफलता की नई कहानी लिखने वाली जनार्दन सिंह की पुत्री अनीता को यूनिसेफ ने सुपर स्टार गर्ल चुना है, वहीं अपने वार्षिक कैलेण्डर में भी प्रथम स्थान दिया है जबकि राजेन्द्र कृषि यूनिवर्सिटी ने अनिता को 'हनी गर्ल' की उपाधि दी है।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने चौथी कक्षा के पुस्तक में इनकी उपलब्धियों को शामिल किया है। इनवॉरमेंटल स्टडीज लुकिंग एराउंड नामक पुस्तक में 'अनिता एंड द हनीवीज’ नामक चैप्टर के माध्यम से देश भर में चौथी कक्षा के बच्चे अनिता की गाथा को न सिर्फ पढ रहे है, बल्कि उसमें प्रकाशित चित्रों से प्रेरणा भी ले रहे है। इस पुस्तक के पांचवे अध्याय में बकरी चराने से लेकर अनिता के 'हनी गर्ल स्टार' बनने तक के सफर को पढ़ाया जा रहा है, वह भी अनिता की जुबानी।
अनिता आज भले ही सफलता का पर्याय बन चुकी है, लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था। विकास की रोशनी से महरूम पिछड़ी जाति में जन्मी अनिता कुशवाहा के भविष्य के बारे में यही कल्पना की जा सकती थी कि वह बकरियां चराते हुए बचपन बिताएगी और स्कूल में पढ़े बिना बड़ी होने पर किसी से ब्याह दी जाएगी, लेकिन किस्मत को यह मंजूर नहीं था।
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