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डाउनलोड करेंपटना/मुजफ्फरपुर। अब देश की सर्वोच्च अदालत को भी यह चिंता सताने लगी है कि 13 साल की नवरूणा जिंदा है या नहीं? अदालत ने जब यह सवाल पूछा तो सरकार की ओर से बताया गया कि उसे नवरूणा के जीवित होने या नहीं होने के बारे में जानकारी नहीं है क्योंकि मामले की छानबीन चल रही है। पुलिस लापता लड़की का ब्लड सैंपल लेना चाहती है ताकि डीएनए टेस्ट कराया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवायी के दौरान अदालत ने डीएनए टेस्ट के लिए नवरूणा के माता-पिता का ब्लड सैंपल लेने का बार-बार आग्रह किया गया जिसे अदालत ने यह कहते हुए ठुकरा दिया जब तक इस मामले में सभी पक्षों को नहीं सुन लेगी, तब तक डीएनए टेस्ट के संबंध में कोई फैसला नहीं दिया जा सकता।
बिहार के मुजफ्फरपुर से 12 साल की नवरूणा को उसके घर से अपराधी बीते सितंबर महीने में उठा ले गये थे। उसके बाद से उसका कुछ भी पता नहीं चला। अलबत्ता उसके घर के पास से बरामद कंकाल को लेकर पुलिस डीएनए टेस्ट कराने पर जोर दे रही है। मामले की जांच राज्य सरकार ने सीआईडी को सौंप दी है।
न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह इजाजत दे दी कि मामले में नवरूणा के माता-पिता सह याचिकाकर्ता हो सकते हैं और अपनी बात अदालत के सामने रख सकते हैं। मंगलवार को इस मामले पर सुनवायी हुर्ई। इस पर अगली सुनवायी पहली जुलाई को होगी।
नवरूणा को बरामद करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के चार छात्रों अभिषेक रंजन, आदित्य कुमार, राहुल मौर्या और निखिल कुमार त्यागी ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका के आलोक में केंद्र व बिहार सरकार को नोटिस जारी हुआ था। उसके जवाब में दोनों सरकारों की ओर से बताया गया कि नवरूणा की तलाश की जा रही है। तब राज्य सरकार ने इस बात से इंकार किया था कि याचिकाकर्ता अभिषेक रंजन को धमकाया गया है।
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