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बिहार में सर्वे- 64% लोगों ने कहा- शिक्षा का स्तर सुधरे, 49% बोले- रोजगार का हो इंतजाम

3 वर्ष पहले
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पटना.  आज बिहार 106 साल का हो गया। आजादी के बाद 71 साल का। विभिन्न कालखंडों में राज्य कई उतार चढ़ाव से गुजरा। इसका भूगोल भी बदला। स्थापना दिवस मनाने की शुरुआत 2010 से हुई। इतने लंबे अंतराल के बाद जनता किस बात को राज्य की बड़ी जरूरत मानती है? बिहार को भविष्य में किस रास्ते आगे बढ़ना चाहिए? यह सब जानने के लिए दैनिक भास्कर ने पाठकों से 20 सवाल पूछे। राज्य के सभी 38 जिलों में हुए इस ऑनलाइन सर्वे में 30,844 लोगों ने हिस्सा लिया। यह पहला सबसे बड़ा और निष्पक्ष सर्वे है।

 

38 जिलों के 30,844 लोगों की राय, जानिए बिहार क्या सोचता है, क्या चाहता है...
- जनता की निगाह में बिहार की सबसे बड़ी जरूरत शिक्षा क्षेत्र में सुधार है। यह एक ऐसी जरूरत है जो हर आय और आयु वर्ग ने बराबरी से रेखांकित किया। शहरी हो या ग्रामीण इलाके, जनता की निगाह में शिक्षा पर सर्वाधिक फोकस होना चाहिए। महिलाओं ने महिला सशक्तीकरण और समाज सुधार कार्यक्रमों से भी इसे बड़ी जरूरत बताया है। सर्वे में शामिल महिलाओं में 65.26% ने ऐसी राय व्यक्त की।

- सबसे जोरदार आवाज तो खुद छात्रों की ओर से उठी है। इनमें 66.12% तो वो हैं जो 18 साल से कम उम्र के हैं। कमोबेश यही अनुपात अन्य आयु वर्ग का भी है।  राज्य की टॉप-10 जरूरतों की रैंकिंग में लोगों ने शिक्षा के बाद दूसरी - सबसे बड़ी जरूरत रोजगार के अवसर पैदा करने को बताया है। 61.43% की राय में शिक्षा और रोजगार के समुचित इंतजाम के अभाव में राज्य से प्रतिभा, श्रम और पूंजी का पलायन जारी है।

- सर्वे में तीसरी बड़ी प्राथमिकता जो उभर कर सामने आई है वह है बेहतर स्वास्थ्य सेवा की चहुंओर उपलब्धता। राज्य को खुले में शौच से मुक्त कराना, गांव टोलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने से भी अधिक सेहत के मोर्चे को तवज्जो देने की मांग दर्शाती है कि कोई न कोई पेंच ढीला है।

-  सर्वाधिक बाढ़, सुखाड़ झेलने और राज्य की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर होने के बावजूद इन क्षेत्रों का शीर्ष प्राथमिकता में दर्ज न होना इंगित करता है कि लोग मान चुके हैं कि प्राकृतिक आपदा नियंत्रण के बाहर की चीज है और खेती ऐसी आपदाओं से अछूती नहीं रहेगी। 
- कभी क्राइम के लिए बदनाम इस राज्य में अपराध पर नकेल कसने को लोगों ने अपनी प्राथमिकता सूची में पांचवें स्थान पर रखा है। इससे जाहिर है कि स्थितियां अब पहले जैसी नहीं रहीं। होतीं तो नि:संदेह यह मसला मुद्दों की प्राथमिकता में शीर्ष पर होता।

 

37% लोगों की राय में प्रशासनिक पारदर्शिता में नरमी बरती जा रही

विधि व्यवस्था, शिक्षा क्षेत्र में सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता के मसले पर लोगों का मानना है कि सरकार का रुख नरम हुआ है।

 

ये हैं बिहार की जनता के हिसाब से पहली 5 प्राथमिकताएं

1. शिक्षा क्षेत्र में सुधार
64% के लिए यह पहली प्राथमिकता।
- सर्वे में शामिल महिलाओं में 65.26% व 63.71% पुरुषों ने ऐसी ही राय व्यक्त की। युवाओंं में ऐसी राय वाले 66.12% तो वो हैं जो 18 साल से कम उम्र के हैं। यही अनुपात अन्य का भी है।

 

2. रोजगार के अवसर
49% नेे पहली प्राथमिकता इसे माना।
- इनमें 52.15% लोग 18-30 वर्ष के हैं। पुरुषों में रोजगार की चाहत आम है, बड़ी बात है कि 42.64% महिलाएं इसकी पक्षधर हैं। 47.60% शहरी तो 50.91% ग्रामीण रोजगार चाहते हैं।

 

3. बेहतर स्वास्थ्य सेवा

45% के लिए सबसे बड़ी जरूरत स्वास्थ्य सेवा।
- सर्वे में 44.98% पुरुष स्वास्थ्य सेवा को शीर्ष जरूरत मानते हैं तो 40.41% महिलाएं इस राय की हैं।

 

4. कृषि क्षेत्र का विकास 
39% के लिए सबसे बड़ी जरूरत।
- 30 साल से अधिक उम्रवाले 39.59% खेतीबारी को तवज्जो देने के पक्षधर हैं। 46.77% किसान और 40.39% गैर स्नातक इस राय के हैं। इस समूह की दूसरी प्राथमिकता शिक्षा है।

 

5. अपराध पर नकेल

38% के लिए सबसे बड़ी जरूरत।
- 30 साल से अधिक आयु वाले 42.12%, गृहणी 45.57% तो 40.69% ग्रामीणों ने अपराध नियंत्रण को पहले स्थान पर रखते हुए रैंकिंग की। इनकी नजर में दूसरी प्रायोरिटी समाज सुधार है।

 

बिहार के लोगों से मिले जवाब के मुताबिक आखिरी 5 प्राथमिकताएं

1. खुले में शौच से मुक्ति
37% की नजर में यह पहली प्राथमिकता।
- यह आवाज गांव से ज्यादा बुलंद हुई। इस मुद्दे को सर्वोपरि मानते हैं 40.33% ग्रामीण। 38.54% गृहणियों की यह पहली प्राथमिकता है। अच्छी बात यह कि 37.19% पुरुष इसके पक्षधर हैं।

 

2. गांव-टोलों में सुविधाएं

36% के लिए सबसे बड़ी जरूरत।
- ग्रामीणों की राय में गांव में बुनियादी सुविधाओं का सृजन सरकार की टॉप प्रॉयोरिटी होनी चाहिए। 39.48% गांव के लोगों की यही राय है। इस श्रेणी की रैंकिंग में भी दूसरे स्थान पर शिक्षा है।

 

3.  बाढ़/ सुखाड़ से मुक्ति

35% की नजर में सबसे पहले यह काम हो।
- सर्वे में मंतव्य रखने वालों में 40.76% किसान, 38.88% ग्रामीण व 37% व्यापारी हैं।

 

4.  समाज सुधार कार्यक्रम
28% के अनुसार बिहार इससे आगे बढ़ेगा।
- मुद्दों की प्राथमिकता सूची में समाज सुधार को टॉप पर रखने वालों में 30.92% की उम्र 18 से कम है। 32.25% ग्रामीण और 29.79% किसान हैं। शहर से ज्यादा गांव से यह आवाज उठी।

 

5.  महिला सशक्तीकरण
28% ने तरक्की का मूलमंत्र इसे माना।
- महिला सशक्तीकरण के सबसे बड़े तरफदार 31.13% 18 साल से कम। पुरुषों-27.37% की तुलना में 34.09% महिलाएं इस सवाल पर मुखर हैं। महिलाओं में 35.69% घरेलू हैं।

 

*ऑनलाइन किए गए राज्यव्यापी सर्वे का आकलन प्रोफेशनल सर्वे एजेंसी शाइन रिसर्च एंड सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड ने किया है।

 

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