सभी पैसेंजर्स को सूचित किया जाता है कि इस ट्रेन में टॉयलेट नहीं है... / सभी पैसेंजर्स को सूचित किया जाता है कि इस ट्रेन में टॉयलेट नहीं है...

रेलवे स्टेशन पर मुंबई-दिल्ली व अन्य जगहों की अधिकांश ट्रेनों का आवागमन प्लेटफॉर्म नंबर 2 से होता है।

Feb 18, 2018, 04:00 AM IST

आरा. यात्रियों व ट्रेनों से जुड़ी सूचनाओं के प्लेटफॉर्म पर माइक से प्रसारण की फेहरिस्त में डीएसयू व ईएमयू सरीखी लोकल ट्रेनों के बारे में एक आवश्यक सूचना जोड़नी बेहद जरूरी है। क्योंकि ये सीधे-सीधे यात्रियों की सहुलियत और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मसला है। दरअसल, आरा से गुजरने वाली लोकल ट्रेनों में शौचालय नहीं है। अगर आपको रास्ते में शौच की तलब लग जाए तो ट्रेन रुकने का इंतजार करने के सिवाय कोई चारा नहीं है।

ऐसा तब है कि पूरे देश में प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। जिसके लिए घर-घर शौचालय बनाने की मुहिम जारी है। लोगों को खुले में शौच से होने वाली बीमारियों के बारे में सचेत किया जा रहा है। विरोधाभास है कि रेलवे रोजाना लोकल ट्रेनों के हजारों यात्रियों को खुले में शौच करने के लिए विवश कर रहा है। यह नजारा आम है। लोकल ट्रेनों के किसी स्टेशन के आउटर सिग्नल पर रुकते दर्जनों यात्री उतर जाते हैं और शौच से निवृत होकर चैन की सांस लेते हैं।


प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर दूर से ही बदबू देता है शौचालय


रेलवे स्टेशन पर मुंबई-दिल्ली व अन्य जगहों की अधिकांश ट्रेनों का आवागमन प्लेटफॉर्म नंबर 2 से होता है। ईएमयू सहित अन्य ट्रेनों का ठहराव प्लेटफॉर्म के छोर पर आगे की ओर रहता है। फिर भी प्लेटफॉर्म पर बने शौचालय की उचित देखरेख नहीं होता। शौचालय दूर से ही बदबू देता है, जिससे कोई यात्री इसका इस्तेमाल नहीं करता। प्लेटफॉर्म नंबर 3 के भी ऐसे ही हालात हैं। इन दोनों प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के बैठने के इंतजाम भी नाकाफी हैं। यात्री सुविधाएं बढ़ाने का प्रोजेक्ट तैयार है, परंतु इस पर अमल बाकी है। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक आरा जंक्शन से कुल 45 हजार यात्री रोजाना आवागमन करते हैं। इनमें से करीब 25 हजार यात्री सिर्फ प्लेटफॉर्म 2 से ही अपनी ट्रेनें पकड़ते हैं।

मेमू ट्रेन में शौचालय, पर डीएसयू व ईएमयू में नहीं


पटना से आरा-सासाराम व अन्य जगहों के लिए मेमू ट्रेन चलायी जा रही है, उसमें बाथरूम है। परंतु डीएमयू पैसेंजर ट्रेन छोटी दूरी के लिए परिचालन की दृष्टि से बेहतर मानी जाती है। इसमें यात्री क्षमता अधिक रहती है। साथ ही खड़े रहने की क्षमता भी साधारण कोच से ज्यादा है। लेकिन डीएमयू व ईएमयू में शौचालय युक्त रैक के लिए रेलवे बोर्ड से मंजूरी नहीं मिली है।


निर्णय पर निर्भर है टॉयलेट


दानापुर रेल मंडल के पीआरओ संजय कुमार ने बताया कि लोकल पैसेंजर ट्रेनों को छोड़ किसी भी ईएमयू, डीएमयू में टॉयलेट लगाने का प्रावधान नहीं है। नई रेक में टॉयलेट लगा आ रहा है। टॉयलेट युक्त डीएमयू ट्रेन की योजना रेलवे बोर्ड के निर्णय पर निर्भर है।

कष्टदायी है पटना तक 2-3 घंटे की यात्रा
मंटू पांडेय ने सवाल किया कि ट्रेन में शौचालय युक्त डीएमयू बोगी लगाने की योजना क्यों नहीं बनाई जा रही है? क्या लोकल पैसेंजर को शौच नहीं लगती? पटना जा रही सरस्वती देवी ने कहा कि आरा से पटना के बीच करीब 2 से 3 घंटे का सफर बड़ा कष्टदायी है। महिलाएं तो खुले में शौच भी नहीं कर सकतीं? बिंदु कुमारी ने कहा कि एक तरफ सरकार खुले में शौच करने पर मनाही कर रही है और दूसरी तरफ लोकल ट्रेन के यात्रियों को खुले शौच करने पर विवश कर रही हैं, ऐसा क्यों? कई यात्री शुरुआती स्टेशन से अंतिम गंतव्य स्टेशन तक के लिए सफर करते हैं। रास्ते में शौच की तलब हो गई तो मुसीबत हो जाती है।

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