कबीर ने पाखंड पर प्रहार किया

4 वर्ष पहले
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कबीरने हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों के पाखंड पर प्रहार किया है। वह बहुत बड़े राम भक्त थे लेकिन उनके राम-रहीम से भिन्न नहीं थे। यह बातें प्रसिद्ध कवि सत्यनारायण ने शुक्रवार को अभिलेख भवन में कही। वह मंत्रीमंडल सचिवालय(राजभाषा) विभाग की ओर से यहां आयोजित कबीर जयंती समारोह में बतौर उद‌्घाटनकर्ता बोल रहे थे। कबीर ने सांप्रदायिक सौहार्द और समाज में मेलजोल का संदेश दिया। अरुण शाद्वल ने कहा कि कबीर ने जीवन भर समाज में व्याप्त कुरीतियों और आडंबरों का विरोध किया। कबीर ने जहां एक ओर ढाई आखर प्रेम के दोहे से प्रेम की महिमा बताई वहीं निंदकों को भी साथ रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि कबीर से बड़ा कोई अर्थशास्त्री नहीं हुआ। कबीर का मानना था कि मनुष्य अगर अपनी आवश्यकतानुसार ही संसाधनों को संग्रहित करे तो कभी लड़ाई-झगड़ा नहीं हाेगा। कबीर भले ही अनपढ़ थे लेकिन उन्हें सभी विषयों पर गहरी पकड़ थी। वह सभी धर्मों के लोगों को आपस में मेल-मिलाप के साथ रहते देखना चाहते थे। समारोह की अध्यक्षता राजभाषा निदेशालय के निदेशक रामबिलास पासवान ने की। वहीं इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शांति जैन, उपेंद्र नाथ पाण्डेय, सुरेश पासवान, शत्रुघ्न प्रसाद आदि ने भी अपने विचार रखे।

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