पुरानी योजनाएं आज भी धरातल पर नहीं
पटनाविश्वविद्यालय में एक बार फिर सीनेट बैठक की तैयारियां जारी हैं। बैठक हर बार की तरह इस बार भी महत्वपूर्ण भी है। इसी बैठक के आधार पर तय होगा कि वित्तीय वर्ष 2016-17 में किन योजनाओं पर पीयू प्रशासन काम करेगा। बैठक पांच मार्च को होगी। सूत्रों की मानें तो इसमें लगभग 340 करोड़ रुपए का बजट पेश होगा। कुछ नई योजनाएं भी लाई जाएंगी। लेकिन पिछली दो बैठकों से पारित योजनाओं का हाल बुरा है। जो योजनाएं बनी और पारित हुईं वो फाइलों से आगे नहीं बढ़ीं। सीनेट में कुलपति के अभिभाषण से प्रस्तावों की सूची तक में कई योजनाएं पारित हुईं लेकिन काम के नाम पर कुछ नहीं हुआ है।
विविमें जारी है टकराव
पटनाविश्वविद्यालय में पिछले दो साल में सकारात्मक कार्यों से अधिक टकराव के मामले ही सामने आए हैं। छात्र तो कैंपस डेमोक्रेसी के साथ कुलपति की पीयू मुख्यालय में गैरमौजूदगी के मामले पर नाराज रहे हैं। दूसरी ओर शिक्षक और कर्मचारी वेतन विसंगति, प्रोन्नति, वेतन निर्धारण जैसे मुद्दों पर ही पीयू प्रशासन को घेरते रहे। नतीजा हुआ कि कुलपति डॉ. सिम्हाद्रि ने मुख्यालय के अपने कार्यालय में आना ही छोड़ दिया। अपने आवासीय कार्यालय में ही कुलपति बैठक करते रहते हैं।
>कर्मचारियों शिक्षकोंका आवास : पीयूएक आवासीय विश्वविद्यालय रहा है, लेकिन बीतते वक्त के साथ खराब भवनों के कारण शिक्षकों कर्मचारियों को कैंपस से बाहर रहना पड़ रहा है। कुलपति डॉ. वाईसी सिम्हाद्रि के वर्तमान कार्यकाल की पहली बैठक में शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए भवन के प्रस्ताव पर सहमति बनी। लेकिन इसमें कोई काम नहीं हुआ। अबतक इसका प्रोजेक्ट तक तैयार नहीं हुआ है।
>कर्मचारियों केबच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम स्कूल : डॉ.सिम्हाद्रि के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है कर्मचारियों के बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम स्कूल की स्थापना। अपने पूर्व से लेकर वर्तमान कार्यकाल में डॉ. सिम्हाद्रि इस प्रस्ताव की चर्चा करते रहे हैं। पिछली सीनेट बैठक में भी उन्होंने इस पर प्रतिबद्धता जताई। लेकिन इस प्रस्ताव का क्रियान्वयन तो दूर, अबतक इसमें कोई काम शुरू नहीं हुआ।
>नए कोर्सकी शुरुआत : पिछलेदो सीनेट बैठकों में किसी नए कोर्स को शुरू करने का प्रस्ताव नहीं पारित हुआ है। पीयू प्रशासन ने इसकी कोई तैयारी नहीं की है। हालांकि पूर्व से ही कई योजनाएं लंबित हैं। इस पर भी पीयू प्रशासन कार्रवाई नहीं कर सका। बीएन कॉलेज में एमएससी इन इलेक्ट्रॉनिक्स शुरू करने का प्रस्ताव पारित होने के बाद भी शुरुआत नहीं हो पाई।