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अभिभावकों की भी होती है परीक्षा

5 वर्ष पहले
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पटना|परीक्षा सिर्फबच्चों की नहीं, अभिभावकों की भी है। बच्चों की परीक्षा के लिए उन्हें भी तैयारी करनी होगी। क्योंकि बच्चे की सफलता में अभिभावकों का बड़ा योगदान होता है। उनका प्यार-दुलार बच्चों में सिर्फ आत्मविश्वास भरता है, बल्कि परीक्षा का डर भी निकालता है। बोर्ड परीक्षा के दौरान अभिभावक बच्चों का कैसे ध्यान रखें, भास्कर स्ट्रेस मैनेजमेंट सीरीज के तहत सातवें और अंतिम दिन बता रहे हैं डॉन बॉस्को एकेडमी के निदेशक ए. रोजारियो...

परीक्षा के समय विद्यार्थियों को लगता है कि उनकी तैयारी नाकाफी है। ऐसे में वह परेशान होने लगते हैं। अगर ऐसा हो तो अपने बच्चों को गले लगाएं और कहें- यू कैन डू इट। ऐसा करने से उनका आत्मविश्वास जगेगा। इसके अलावा, बच्चे के सोने से पहले कुछ देर पॉजिटिव बातें करें। इससे मूड लाइट होगा और वह खुशनुमा नींद ले पाएगा।

दिनचर्या का रखें ख्याल|परीक्षा के समय अभिभावकों को बच्चों के खाने-पीने से लेकर उनके सोने तक की दिनचर्या का ख्याल रखना चाहिए। उनके शरीर और दिमाग को प्रॉपर एनर्जी और आराम मिले, इसका ख्याल रखें।

घर का वातावरण बहुत ही ज्यादा संजीदा नहीं होना चाहिए। रोज की तरह माहौल हल्का और हंसी-खुशी भरा हो। ज्यादा संजीदगी भी बच्चे पर दबाव बनाती है। बच्चों को यह संदेश देने की कोशिश करें कि परीक्षा कोई हौवा नहीं है। यह जिंदगी का हिस्सा है, जिससे गुजरना कोई मुश्किल भरा काम नहीं।

घर को जेल बनाएं | बच्चों की परीक्षा के समय अभिभावक काउंसलर की भूमिका अदा करें। इस समय बच्चों को सामान्य दिन की अपेक्षा थोड़ा अधिक प्यार देना चाहिए। उनपर परीक्षा को लेकर दबाव डालें और ही परीक्षा के परिणाम के बारे में बात करें। घर से निकलने पर पाबंदी लगाएं। यह ख्याल रखें कि वह ज्यादा समय अकेले रहे। परीक्षा के संदर्भ में उनके मन में पॉजिटिव बातें डालने की कोशिश करें।

दोस्त बना लें, हर बात करें शेयर| बच्चे के अंदर पल रहे तनाव को दूर करना है तो उन्हें अपना दोस्त बना लें। उनके दिल की हर बात जानने की कोशिश करें। वे क्या सोचते हैं, इसकी जानकारी आपको होनी चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो उन्हें सही मार्गदर्शन मिलेगा। बेहतर मार्गदर्शन के बिना कोई भी व्यक्ति सफलता हासिल नहीं कर सकता है।

परीक्षा के समय अगर आपका बच्चा पढ़ रहा है तो अभिभावक किसी अन्य रूम में सीरियल या फिल्म देखें। इससे उनका ध्यान नहीं भटकेगा। कोशिश करें कि आप भी उनके साथ कुछ पढ़ें। इससे उनको अकेलापन महसूस नहीं होगा और आपका साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ाएगा।

रात को साथ खाना खाएं| कम से कम रात में पूरा परिवार साथ खाना खाएं। अभिभावक ख्याल रखें कि डिनर टेबल पर परीक्षा से संबंधित निगेटिव बातें नहीं की जाएं। परीक्षा से इतर हल्की-फुल्की और मजाकिया बातें हों।

कभी तुलना करें

अपनेबच्चे की तुलना पड़ोस के बच्चे या टॉपर से करें। इससे उसपर मानसिक दबाव बनता है। उसमें हीनता की भावना उत्पन्न होती है। ऐसी परिस्थितियां अगर लंबे समय तक बनी रहेंगी तो वह डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। साइकोलॉजिस्ट मानते हैं कि लगातार तुलना और अपने बच्चे को नीचा दिखाने से अभिभावक बच्चों के बीच दूरी बढ़ती है।

ए. रोजारियो

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