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संस्कृत भाषा में है राष्ट्र को संजीवनी देने की शक्ति

Patna News - बिहारसंस्कृत संजीवन समाज, प्रज्ञा समित बिहार पेंशनर समाज के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को संस्कृत दिवस...

Dainik Bhaskar

Aug 19, 2016, 02:05 AM IST
संस्कृत भाषा में है राष्ट्र को संजीवनी देने की शक्ति
बिहारसंस्कृत संजीवन समाज, प्रज्ञा समित बिहार पेंशनर समाज के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को संस्कृत दिवस समारोह का आयोजन हुआ। सावन पूर्णिमा पर पाटलिपुत्र कॉलोनी में हुए समारोह में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति विजय शंकर दुबे ने संस्कृत के उद्भव विकास पर प्रकाश डाला और कहा कि अभी संस्कृत भाषा को लेकर समाज में उदासीनता गई है। इसके चलते आम जनों सरकार में भी भ्रम की स्थिति हो गई है कि संस्कृत मृत भाषा है। लेकिन, ऐसा है नहीं, संस्कृत जागृत भाषा है। इसी भाषा में ऐसी शक्ति है, जो राष्ट्र को संजीवनी दे सकती है।

बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शशि शेखर तिवारी ने भाषा-वैज्ञानिक दृष्टि से संस्कृत भाषा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने संस्कृत के शब्दों की महत्ता बताई। कहा- संस्कृत भाषा की भारत में समृद्ध विरासत रही है। लोगों के रग-रग में यह भाषा घुली हुई है। इसे चाह कर भी कोई नहीं मिटा सकता है।

निशा, रितेश आयुषी को मिला संस्कृत श्लोक प्रतियोगिता पुरस्कार

महावीरमंदिर से जुड़े संस्कृत के विद्वान डॉ. भवनाथ झा को संस्कृत की अनुपम कृति अष्टाध्यायी पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान तीन छात्र-छात्रा निशा कुमारी, रितेश कुमार आयुषी कुमारी को संस्कृत श्लोक प्रतियोगिता पुरस्कार से नवाजा गया। साथ ही संस्कृत में अभिरुचि रखने वाले 11 छात्रों को भी सांत्वना पुरस्कार से नवाजा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शिववंश पाण्डेय ने की। संचालन प्रो. मुकेश कुमार ओझा, स्वागत भाषण डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन रामनारायण सिंह ने किया। इस मौके पर बिहार पेंशनर समाज के रविशंकर सिन्हा, पुरुषोत्तम उपाध्याय, पत्रकार चंद्रशेखरम, विशुद्धानंद, शंभूनाथ पाण्डेय, चंद्रशेखर पाठक आदि ने अपने विचार रखे।

पटना| पाटलिपुत्रासंस्कृत संस्थान एवं समग्र विकास संस्थान की ओर से शुक्रवार को संस्कृत दिवस के अवसर पर सिद्धेश्वर ओझा स्मृति संस्कृत भाषण प्रतियोगिता का आयोजन फिरोज गांधी महाविद्यालय में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश चंद्र सिन्हा ने दीप प्रज्वलित कर किया। अध्यक्षता करते हुए डॉ. अजय कुमार झा ने कहा कि संस्कृत भारत की आत्मा है। मुख्य अतिथि डॉ. मिथिलेश कुमार मिश्रा ने कहा कि संस्कृत के बिना भारतीयता की कल्पना नहीं की जा सकती। संस्कृत सरलतम सर्वजन सुलभ भाषा है। आयोजन प्रमुख अजय कुमार झा ने कहा इस तरह के कार्यक्रमों से उत्साह जागृत होता है। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार से की गई। स्वागत करते हुए डॉ. मुकेश कुमार ओझा ने कहा कि संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए संस्कृत का संरक्षण जरूरी है। यदि संस्कृत भाषा का ज्ञान हो तो विश्व की सभी भाषाओं को सरलतम ढंग से सीखा जा सकता है। वक्ताओं ने संस्कृत को पढ़ना अनिवार्य करने की जरूरत पर भी बल दिया। इस अवसर पर 15 अगस्त को संपन्न गीता पाठ प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया। भाषण प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत किया गया। गौरव कुमार, रितेश कुमार, कुमार सन्नी, को क्रमश: प्रथम, द्वितीय तृतीय पुरस्कार दिया गया। डॉ. मुकेश कुमार ओझा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

अच्छी पहल

बिहार संस्कृत संजीवन समाज, प्रज्ञा समिति बिहार पेंशनर समाज के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को संस्कृत दिवस समारोह में शामिल अतिथि।

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