पहले इस्तीफा कराएं मंजूर, फिर नामांकन
नौकरीमें रहते हुए पंचायत का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने इसपर रोक लगा दी है। कई लोग इस चक्कर में रहते हैं कि नौकरी में रहते चुनाव लड़ लिया और हार गए तो फिर से नौकरी करने लगे। इस बार के पंचायत चुनाव में ऐसा नहीं चलेगा। आयोग ने कहा कि ऐसे लोगों को नामांकन के पहले सिर्फ इस्तीफा देना होगा, बल्कि उनका इस्तीफा स्वीकृत भी हो जाना चाहिए।
दरअसल पिछले चुनावों में कई लोगों ने नौकरी करते हुए पंचायत के पदों के लिए नामांकन कर दिया था। इसे देखते हुए इस बार के चुनाव के लिए सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किया गया है। आयोग ने पहले ही कह दिया है कि आंगनबाड़ी सेविकाएं पंचायत निकायों ग्राम कचहरी के पदों के लिए चुनाव नहीं लड़ सकती हैं।
येनहीं लड़ सकते चुनाव : पंचायतशिक्षा मित्र, न्याय मित्र, विकास मित्र अन्य कर्मी भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। विशेष शिक्षा परियोजना, साक्षरता अभियान, विशेष शिक्षा केंद्रों में मानदेय पर कार्यरत अनुदेशकों, पंचायत के अधीन मानदेय पर कार्यरत दलपतियों, केन्द्र या राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकार से पूर्णत: या आंशिक वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक संस्थाओं में कार्यरत, पदस्थापित प्रतिनियुक्त शिक्षक, प्रोफेसर शिक्षकेतर कर्मचारियों के भी चुनाव लड़ने पर पाबंदी होगी। कार्यरत होमगार्ड, सरकारी वकील(जीपी), लोक अभियोजक(पीपी), सहायक लोक अभियोजक भी पंचायत चुनाव में अभ्यर्थी नहीं हो सकते।
पंचायत चुनाव के लिए 128 आब्जर्वर नियुक्त
पंचायतचुनाव की प्रक्रियाओं पर निगरानी रखने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने 128 आब्जर्वरों की नियुक्ति की है। आयोग ने सचिवालय, मुख्यालय, प्रमंडल, जिला में तैनात अफसरों की सूची संबंधित विभागों के प्रधान सचिव सचिवों को भेज दी है। 11 आब्जर्वरों को सुरक्षित रखा गया है। आयोग जल्द ही आब्जर्वरों की बैठक बुलाएगा। इसमें उन्हें उनके दायित्वों की जानकारी दी जाएगी।