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बाढ़ अवधि के पहले भी मिले नेपाल में निर्बाध प्रवेश करने की अनुमति

5 वर्ष पहले
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भारतनेपाल कोसी और गंडक नदी से जुड़ी परियोजनाओं में एक-दूसरे की सहायता करेंगे। दोनों नदियों से जुड़ी बाढ़ और सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर भी दोनों देश सहमत हुए। बुधवार को भारत नेपाल के अधिकारियों के बीच कोसी एवं गंडक संयुक्त परियोजना की आठवीं बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व बिहार के जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने, जबकि नेपाल का प्रतिनिधित्व नेपाल सरकार के सिंचाई विभाग के महानिदेशक रामानंद प्रसाद यादव ने की।

भारत ने कोसी नदी के वनटप्पू क्षेत्र में शाम के बाद प्रवेश पर लगी रोक को हटाने की मांग की। भारत का कहना था कि बाढ़ अवधि में तो यह रोक हटी रहती है, लेकिन सामान्य अवधि में शाम में ऐसा करने पर रोक लगी होती है। किसी कार्य के लिए प्रवेश में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इससे कार्य बाधित होते हैं। बाढ़ पूर्व के कार्य, मरम्मत के कार्य या फिर किसी तरह का निर्माण तो बाढ़ अवधि के पहले ही होता है। ऐसे में सामान्य दिनों में भी शाम के बाद आसानी से प्रवेश मिलनी चाहिए। भारत ने नेपाल के समक्ष गंडक नदी के क्षेत्र में हुए अतिक्रमण का मामला उठाया और कहा कि इसके कारण बाढ़-सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन में परेशानी हो रही है। इसी तरह कोसी बराज के 36वें फाटक के निकट अवैध निर्माण का मामला भी उठाया गया।

सहमतिपत्र पर हुए हस्ताक्षर : बैठकमें दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग से आम लोगों के कल्याण एवं बेहतरी के लिए लंबित पड़े मुद्दों को सुलझाने पर भी सहमति बनी। नेपाल ने भारत को तमाम मुद्दों पर सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि इस संबंध में लिए गए निर्णयों से नेपाल सरकार भारत को शीघ्र अवगत करा देगी। बैठक में नेपाल के 16, जबकि भारत के 18 अधिकारी शामिल हुए।

अंत में अरुण कुमार सिंह और नेपाल के सिंचाई महानिदेशक रामानंद प्रसाद यादव ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किया।

सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करते बिहार के जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह और नेपाल के सिंचाई महानिदेशक रामानंद प्रसाद यादव।

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