पढ़ने के लिए अपनाएं वैज्ञानिक तरीके
लगातारएक ही काम करने और एक ही विषय पढ़ने से बोरियत होती है। यह ह्यूमन साइकोलॉजी है। परीक्षा लंबे समय तक चलती है, ऐसे में यह लाजिमी है कि विद्यार्थी पढ़ाई के तरीकों में कुछ नयापन लाएं। दुनियाभर में पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए शोध हो रहे हैं। नए मनोवैज्ञानिक वैज्ञानिक तरीकों का ईजाद हो रहा है, ताकि विद्यार्थी बिना बोर हुए कम समय में ज्यादा से ज्यादा ग्रहण कर सकें। आज कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बात करेंगे, जिसे वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिकों ने मान्यता दी है। साइंस और रिसर्च जर्नल पर आधारित पढ़ने के इन वैज्ञानिक तौर-तरीकों के बारे में बता रहे हैं पाटलिपुत्र सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन सिन्हा...
आज स्मार्ट वर्क की जीत होती है। इसलिए अपनी सहूलियत के हिसाब से खुद स्मार्ट तरीके का ईजाद करें। इसमें ऑडियो-वीडियो मोड का इस्तेमाल कर सकते है। वैज्ञानिक और साइकोलॉजिस्ट मानते हैं आंख से देखी और कानों से सुनी चीजें दिमाग में जल्दी बसती हैं। विद्यार्थी एक काम और कर सकते हैं कि वह मन में पढ़ने की बजाए बोलकर पढ़ें। लिखकर पढ़ने से भी चीजें दिमाग में रहती हैं। इससे प्रैक्टिस भी होती है।
सिर्फ किताब से पढ़ने से बोरियत महसूस हो सकती है। इसलिए नोट्स इंट्रेस्टिंग तरीके से बनाना चाहिए। नोट्स बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप उसे रेगुलर किताबों में लिखी चीजों की तरह लिखें और ही उनका विस्तारपूर्ण तरीका इस्तेमाल करें। कुछ महत्वपूर्ण फैक्ट्स की एक श्रेणी तैयार करें जिससे आप उस टॉपिक से रिलेटेड जितने भी महत्वपूर्ण बिंदु हैं, उनको दिमाग में आसानी से रिवीजन के दौरान बिठा पाएं।
क्या आप एक ही जगह दिनभर लगातार कई दिनों तक रह सकते हैं... नहीं, न। तो फिर पढ़ाई एक जगह पर लगातार क्यों करना। दुनिया के बड़े मनोवैज्ञानिक ने माना है कि पढ़ने की जगह में बदलाव करते रहना चाहिए। एक रिसर्च के मुताबिक कुछ छात्रों को कुछ शब्दों की सूची दी गई। इसे दो बार पढ़ना था। एक टीम ने इसे दो विभिन्न स्थान पर पढ़ा। दूसरी टीम ने एक ही जगह का प्रयोग किया। यह पाया गया कि पहली टीम का प्रदर्शन ज्यादा बेहतर रहा। इसके पीछे का विज्ञान यह था कि दिमाग पढ़ते वक्त पृष्ठभूमि और अनुभूतियों को भी ग्रहण करता है। इसलिए एक जगह की बजाय लाइब्रेरी, कॉफी हाउस, अध्ययन कक्ष आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।
लगातार मैथ के फॉर्मूले, केमेस्ट्री के लॉग टेबल... आपको बोर कर सकते हैं। यह देखा जाता है कि परीक्षा के दौरान छात्र एक ही विषय को तबतक पढ़ते हैं जबतक उसकी तैयारी पूरी नहीं हो जाती। ऐसा नहीं करना चाहिए। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि जैसे आप एक ही खाना बार-बार खाकर बोर हो जाते हैं, वैसे ही दिमाग एक ही विषय को अधिक समय तक पसंद नहीं करता है। मसलन सब मिक्स करके पढ़ें। पढ़ाई इंट्रेस्टिंग और फ्लेवर्ड होगी।
रिलैक्सेशन ब्रेक तो बनता है...
हमसीरियल देखते समय ब्रेक लेते हैं, खेलने में ब्रेक लेते हैं तो पढ़ाई में क्यों नहीं। आखिर हम इंसान हैं। एक ही चीज लगातार नहीं कर सकते हैं। दुनियाभर के मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि परीक्षा के समय 20 से 50 मिनट का स्लॉट बनाकर ही पढ़ना चाहिए। इसमें 5 से 10 मिनट का रिलैक्सेशन ब्रेक जरूर लेना चाहिए। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि टाइम स्लॉट में पढ़ने से दिमाग में चीजें काफी समय तक और स्पष्ट रहती हैं।
डॉ. राजीव रंजन सिन्हा