मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल ने दिखाई साहित्य को नई दिशा
तीनदिवसीय मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल रविवार को संपन्न हो गया। इसमें एक ओर जहां मिथिला के साहित्य पर चर्चा-परिचर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर मिथिला की समृद्ध संस्कृति की मनमोहक छटा भी बिखरी। यहां मधुबनी पेंटिंग थी, तो मिथिला का खानपान भी। मैथिली साहित्य के स्टॉलों पर पुस्तकों का विशाल संसार मौजूद था। फेस्टिवल के अंतिम दिन रविवार को सुबह के सत्र में नेपाल से आए साहित्यकार परमेश्वर कापड़िक के कथा संग्रह पथार पर विमर्श का आयोजन किया गया।
इसमें तारानंद वियोगी, रमेश, वीरेंद्र पांडेय, अतुलेश्वर झा, अजीत आजाद ने इस कथा संग्रह पर प्रकाश डाला। सत्र का संचालन रमानंद झा रमण ने किया। इसके बाद के सत्र में मैथिली कहानी लिखने की प्रक्रिया, उसके शिल्प और रचना पर विद्वानों ने चर्चा की। इस सत्र में मिथिलेश राय, ऋषि वशिष्ठ, आशुतोष अभिज्ञ, रवींद्र बिहारी राजू ने भाग लिया। सत्र का संचालन किशोर केशव ने किया। इसमें रमण कुमार सिंह के कविता संग्रह फेर हरियर का विमोचन किया गया।
मैथिलीके लप्रेक संग्रह प्रेमक टाइमलाइन का विमोचन : मैथिलीके पहले लप्रेक संग्रह प्रेमक टाइमलाइन का विमोचन किया गया। इसमें दस युवा साहित्यकारों ने प्रेम पर कम शब्दों में बेहद ही प्रभावी अंदाज में लघुकथा लिखी है। लेखकों में बाल मुकुंद पाठक, नवलश्री पंकज, सुनील कुमार भानु, निधि कात्यायन, गुंजनश्री, श्याम झा, बिंदेश्वर ठाकुर, मुकुंद मयंक, शारदा झा, विकास झा शामिल हैं।
दोपहर साढ़े बारह बजे से मैथिली लघु फिल्म सूप चालनि का प्रदर्शन किया गया। शाम में मैथिली फिल्म गोरकी का प्रदर्शन किया। वहीं कवि सम्मेलन में विभिन्न कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया।
मैथिली के लप्रेक संग्रह प्रेमक टामलाइन का विमोचन करते साहित्यकार परमेश्वर कापड़िक अन्य अतिथिगण।
प्रबोध साहित्य सम्मान से केदारनाथ चौधरी सम्मानित
फेस्टिवलमें मैथिली भाषा के प्रतिष्ठित प्रबोध साहित्य सम्मान 2016 से वरिष्ठ उपन्यासकार केदारनाथ चौधरी को सम्मानित किया गया। स्वाति फाउंडेशन की ओर से दिया जाने वाला यह सम्मान मैथिली भाषा आंदोलन के अग्रणी नेता और प्रसिद्ध विद्वान प्रो. प्रबोध नारायण सिंह की स्मृति में प्रदान किया जाता है। पुरस्कार समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार प्रो. उदय नारायण सिंह नचिकेता ने की, जबकि समाजशास्त्री डॉ. महेंद्र नारायण कर्ण प्रधान अतिथि थे।