सोच बदलेगी तो कम होगा महिलाओं से भेदभाव
घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को कानून की जानकारी जरूरी
समाजमें महिलाओं को बचपन से ही दबाकर रखा जाता है। वह कभी भी अपनी भावनाओं को खुलकर किसी के समक्ष नहीं व्यक्त कर पाती हैं। इनको उचित काउंसिलिंग और समन्वय की जरूरत है। यह बातें मंगलवार को एएन सिन्हा संस्थान में आयोजित सेमिनार में पटना उच्च न्यायालय की वरीय अधिवक्ता श्रुति सिंह ने कहीं। घरेलू हिंसा की पीड़िता के लिए न्याय विषय पर उन्होंने कहा कि जो महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हैं, उन्हें न्याय दिलाने के लिए समाज में पुलिस, जज, अधिवक्ताओं और इनसे जुड़े तंत्र को आगे आना होगा। इन्हें पीड़ित महिलाओं को कानून के बारे में बताना होगा। महिला जागरण केंद्र की अध्यक्षा नीलू ने कहा कि जेंडर विषय पर समन्वय बनाकर तथा उचित मार्गदर्शन से गैर बराबरी और हिंसा को रोका जा सकता है।
सेमिनार में पटना एवं समस्तीपुर जिला चिकित्सा पदाधिकारी गिरींद्र शेखर सिंह, राज्य परियोजना प्रबंधक रूपेश कुमार सिन्हा, समाजसेवी शिवानी चौधरी, हेल्प लाइन की परियोजना पदाधिकारी प्रमिला कुमारी, महिला जागरण केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक बबिता, संजय सिंह आदि मौजूद रहे।
व्यवहार से परेशानी
स्त्रियोंके व्यवहार और उसके कारण हाेने वाली परेशानियों के बारे में बताया गया। महिलाओं के साथ दहेज आैर हिंसा वाली स्थिति में कई बार स्त्रियों की सोच जिम्मेवार होती है चाहें वह प|ी के रुप में हो या मां के रुप में। स्त्रियों को भी सोच बदलनी चाहिए।
महिलाएं खुद लें निर्णय
डॉ.आशा सिंह ने कहा कि आज भी हमारे समाज के हर तबके के परिवार में महिलाओं को खुद से निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। महिला अपनी इच्छा से जमीन या संपति संबंधी मामले नहीं ले सकती। उन्हें अपने निर्णय लेने के लिए पुरुषों पर आश्रित होना पड़ता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि रेप और छेड़खानी जैसे मामलों पर हम महिला कॉलेजों और स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम करते है लेकिन यह कार्यक्रम लड़कों के लिए ज्यादा जरुरी है। लड़के महिलाओं के साथ छेड़खानी और हिंसा ना करें हमें इसकी ट्रेनिंग देनी चाहिए। प्यार में इंकार मिलने पर हत्या और एसिड अटैक जैसे कदम उठाते है। र|ेश्वर मिश्रा ने मंगलवार को सती प्रथा के दुष्परिणामों और उसके दर्द को बताया। उन्होंने कहां कि पहले भी महिलाओं के साथ जेंडर भेदभाव होता था हमें अपनी मानसिकता को बदलना चाहिए। इसके अलावा थर्ड जेंडर को भी बराबर सम्मान मिलना चाहिए।