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आरक्षण पर भ्रम फैलाकर सत्ता में लौटे नीतीश किसानों के प्रति उदासीन

5 वर्ष पहले
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पूर्वउपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि मौसम की मार झेलकर धान उपजाने वाले किसान अब राज्य सरकार की नाकामी से परेशान हैं। आरक्षण पर भ्रम फैलाकर सत्ता में लौटी नीतीश सरकार पैक्स के जरिए किसानों से 3.25 लाख टन धान खरीद का दावा कर रही है। राज्य में 27 लाख टन धान खरीद के लक्ष्य की तुलना में वास्तविक खरीद तो 2 लाख टन से भी कम हुई। चुनाव जीतने के बाद नीतीश कुमार किसानों की चिंता छोड़ दूसरे राज्यों में राजनीतिक जोड़-तोड़ करने में लग गए हैं।

सुमो ने कहा कि राज्य में धान खरीद के लिए 3807 करोड़ की जरूरत है, लेकिन जिलों को मात्र 244 करोड़ रुपए दिए गए। बिहार राज्य खाद्य निगम के गोदामों में 2 लाख टन चावल जमा हो जाना था, पर 18 हजार टन ही जमा हुआ। निगम ने चावल के लिए तो बोरा खरीदा है और ही उसके पास चावल की गुणवत्ता जांचने वाले अधिकारी हैं। धान खरीद में भारी अराजकता है। अधिकतर चावल मिलों पर मुकदमा है, इसलिए वे सरकारी खरीद के धान की मिलिंग करने को तैयार नहीं हैं। बाकी मिलों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

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