युवक की हत्या उसके दोस्त ने ही की थी
रुचि अपहरण कांड
चारफरवरी को मसौढ़ी के बीएलपी कॉलेज में चाकू से गोद मसौढ़ी के संतोष की हुई हत्याकांड का पुलिस ने शनिवार को उद्भेदन का दिया। संतोष की हत्या उसके ही करीबी दोस्त मंसूर आलम ने की थी। मंसूर आलम उर्फ रंजित दास उर्फ पप्पू उर्फ सुखु पटना आलमगंज थाना के बाल किशुन गंज कबूतरी गली मोहल्ला निवासी मों उस्मान आलम का पुत्र है। वर्तमान में वह मसौढ़ी के अस्पताल रोड निवासी सुलेखा देवी के मकान में किराये पर रह रहा था। मंसूर ने चार शादियां कर रखी थीं उसके आचरण से तंग आकर उसकी चारों बीबियों ने उसे छोड़ दिया। मंसूर आलम की संतोष से एक वर्ष पूर्व दोस्ती हुई थी वह उसके घर में जाया करता था। इसी दौरान संतोष की प|ी से मंसूर आलम एक तरफा़ मोहब्बत करने लगा। वह संतोष की प|ी पर बार-बार शादी करने का दबाव बनाया करता
पुलिस के अनुसार मंसूर आलम ने संतोष की प|ी को हासिल करने के लिए संतोष की हत्या करने की साजिश रची थी। इसी बीच 4 फरवरी की रात शराब के नशे में संतोष मसौढ़ी के संघतपर मोहल्ला में उसे मिला। मंसूर ने उसे शराब पिलाने की बात कह संतोष को बीएलपी कॉलेज में ले गया और उसकी चाकू से गोद कर हत्या कर दी। पुलिस पूछताछ में मंसूर आलम ने यह भी बताया कि पुलिस जब संतोष का शव उठा रही थी तब वह वहीं था। बाद में कुछ दिन बीत जाने के बाद उसे लगा कि वह इस मामले से अब बच निकला है तो वह हत्या के चार दिन बाद संतोष के घर गया और उसकी प|ी को किसी तरह बहला-फुसला कर कुछ देर के लिए अपने रूम पर ले आया। फिर उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा जब संतोष की प|ी ने इसका विरोध किया तो उसने गुस्से में कहा कि अब उसका पति वापस नहीं आएगा इसलिए अब उससे शादी कर ले। संतोष की प|ी को मंसूर आलम पर शक हुआ और फिर उसने पूरी बात घर आकार अपने ससुर को बताई। बाद में दोनों पुलिस के पास पहुंचे और मंसूर आलम को गिरफ्तार कर पूछताछ करने को कहा। इधर पुलिस ने मंसूर आलम को गिरफ्तार कर जब पूछताछ की तो उसने पूरी कहानी बयां कर दी थानाध्यक्ष लाल मोहन सिंह ने बताया कि आरोपी मंसूर आलम ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है
परिवार के बढ़ते खर्च को पूरा करने के लिए महिला ने किया था अपहरण
मसौढ़ी|थानाकेहरवंशपुर गांव के डोमाचक टोला से बुधवार को अगवा की गई रूचि के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार टोला की ही मिंता देवी रूचि के चचेरे भाई राहुल को शनिवार को जेल भेज दिया जबकि दो अन्य आरोपी फरार बताए जाते हैं। रूचि के अपहरण के बाद पुलिस के बढ़ते दबिश से घबराकर मिंता ने अपहरण के अगले दिन गुरूवार को रूचि को मसौढ़ी डाकघर के समीप स्थित टेंपो पड़ाव के पास लाकर छोड़ दिया था। हालांकि मौके पर सादे लिवास में मौजूद पुलिस ने मिंता देवी को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उसकी निशानदेही पर पुलिस ने रूचि के चचेरे भाई डोमाचक के राहुल को भी गिरफ्तार कर लिया था। इधर पुलिस को दिये गये अपने बयान में मिंता देवी ने बताया कि उसने आर्थिक तंगी के कारण ही फिरौती के लिए रूचि का अपहरण किया था। उसने बताया कि 19 साल पूर्व उसकी शादी मंद बुद्धि के साधुशरण पासवान के साथ हुई थी और वह कोई काम नहीं करता था। उसे एक पुत्र चार पुत्रियां हैं जिनका भरण पोषण संभव नहीं हो पा रहा था। इसी बीच उसका संपर्क गांव के राहुल कुमार से हुआ जो पूर्व से एक आर्केस्ट्रा पार्टी में काम करता था। उसने राहुल के साथ मिलकर पैसा कमाने के लिए गलत तरीका अपनाने का फैसला किया। राहुल ने उसे फतुहा के राहुल प्रिया से मिलाया और चारों ने मिलकर अपहरण के माध्यम से पैसा कमाने की योजना बनाई। बकौल मिंता राहुल के कहने पर उन्होंने पहले फिरौती के लिए राहुल की चचेरी बहन रूचि को अपहरण करने की योजना बनाई।