एसिड अटैक से चेहरा झुलसा, हौसला नहीं
एसिडअटैक, पति की सड़क हादसे में मौत और अब केस वापस लेने की धमकी के बावजूद अपने दो बच्चों के साथ बिहटा की ऋचा गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है। 2010 की इस गंभीर वारदात के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए ऋचा खुद दौड़-भाग करती है। पुलिस अधिकारियों के कार्यालय से लेकर कोर्ट तक उसे कई-कई बार जाना होता है। दो बच्चों की जिम्मेवारी भी उसके ऊपर है। अपने गुनहगारों को सजा दिलाने का लक्ष्य तय कर चुकी ऋचा लगातार इसके लिए कोशिश कर रही है। उसकी कोशिशों का ही नतीजा है कि पांच साल की सुस्ती के बाद पुलिस ने आखिरकार दिसंबर, 2015 में आरोपियों के घरों की कुर्की के लिए कोर्ट में आवेदन दिया, फिर कुर्की की। अब आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस पूरी सरगर्मी से तलाश जारी रखे हुए है। लेकिन, आरोपी भी किसी किसी माध्यम से ऋचा को धमकी दे रहे हैं।
विरोधकरने पर की थी यह हालत :ऋचा के रिश्ते में चचेरे भाई अमित ने उसके चेहरे पर सिर्फ इसलिए एसिड फेंक दिया था, क्योंकि उसने छेड़खानी की शिकायत कर दी थी। इस अपराध में उसकी प|ी अर्चना ने भी साथ दिया था। 10 जून, 2015 को जब ऋचा घर से निकली, तो अमित और अर्चना ने मिलकर एक गली में उसके ऊपर एसिड फेंक दिया और भाग गए। बात जब पति मनोज कुमार को इसका पता चला, तो उसने ऋचा को हिम्मत दिलाते हुए बिहटा थाने में अमित कुमार, अर्चना अभिषेक के खिलाफ मामला दर्ज कराया। लेकिन, किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। 2010 के इस सदमे से अभी ऋचा उबरी भी नहीं थी कि 2013 में मनोज कुमार दिल्ली में सड़क हादसे के शिकार हो गए। तीन महीने तक इलाज चला। लाखों रुपए खर्च हुए जिसके लिए ऋचा को जमीन तक बेचनी पड़ी। लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका। मनोज की मौत के बाद ऋचा के गुनहगारों को जैसे एक मौका मिल गया। उसे धमकी देने लगे कि अब पति भी नहीं रहा अगर केस नहीं उठाया तो और बुरी हालत कर देंगे।
बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहती है ऋचा
ऋचाफिलहाल अपनी ससुराल में दो बच्चों के साथ रहती है। ऋचा बताती है कि मेरे साथ जो हुआ उसके बाद पति खोये-खोये रहते थे। मैं अपने पति की मौत का जिम्मेवार भी इन्हीं जालिमों को मानती हूं। लिहाजा आरोपियों को सजा दिलाने के लिए वह अंतिम सांस तक लड़ेगी। वहीं बच्चों को अच्छा भविष्य भी देना है और इस जिम्मेवारी को भी वह पूरी तरह निभा रही है। ऋचा बताती है कि ससुराल मायके से जो साहस मिला वही मेरी पूंजी है। इसी से मैं आगे की लड़ाई लड़ रही हूं। आरोपियों की हर धमकी मुझे आगे की लड़ाई के लिए मजबूती देती है।