बिजली के लिए सैटेलाइट से होगी टोलों की पहचान
बिजलीपहुंचाने के लिए टोलों की पहचान सैटेलाइट के माध्यम से होगी। राज्य सरकार और पावर होल्डिंग कंपनी ने इसके लिए व्यापक कार्ययोजना बनाई है।
ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के नए प्रावधान के तहत अब बिजली पहुंचाने के लिए संख्या की बाध्यता खत्म हो गई है। पहले 100 व्यक्ति के टोलों तक ही बिजली पहुंचानी थी। दीन दयाल उपाध्याय योजना के तहत सबको 24 घंटे बिजली देने की योजना है। इसलिए राज्य सरकार गांवों-टोलों में बसावटों की पहचान कर रही है। पावर होल्डिंग कंपनी के अनुसार इस समय बिहार में 90 फीसदी गांवों में बिजली पहुंच चुकी है। ऐसे में छूटे बसावटों की पहचान आवश्यक है। ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के मुताबिक गांवों और बस्तियों की पहचान के लिए सरकार के पास काफी स्रोत हैं। उनके आधार पर तो हम ऐसे बसावटों की पहचान करेंगे ही, साथ ही सुदूर इलाकों के लिए सैटेलाइट का प्रयोग भी किया जाएगा। हम राज्य के तमाम लोगों तक हर हाल में बिजली पहुंचाएंगे। जहां बिजली के खंभे-तार नहीं पहुंचेंगे, वहां हम अपारंपरिक ऊर्जा के विकल्प पर भी काम कर रहे हैं। खासकर नदियों के तटबंधों के बीच रहने वालों के लिए हम ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं।