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स्वास्थ्य सुविधा } राजनेताओंकी सड़क वीरचंद पटेल मार्ग के मुहाने पर होकर भी नहीं बदल रही किस्मत

5 वर्ष पहले
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शशि कांत कुमार }पटना 9905339844

डायलिसिस, पैथोलोजी, नेत्र जांच समेत ज्यादातर जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता के कारण न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में हर दिन 600 से 700 मरीज आते हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था खराब होने से उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

तीन साल पहले अस्पताल में पीपीपी मोड पर साफ-सफाई होती थी। उस समय अस्पताल काफी हद तक साफ रहता था, लेकिन उसके बाद स्थिति खराब होती चली गई। वीरचंद पटेल पथ के मुहाने पर स्थित अस्पताल की हालत बेहद खराब है। साफ-सफाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई गई है, लेकिन ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा। अस्पताल भवन के अंदर के हिस्सों को छोड़कर ज्यादातर सफाई की स्थिति अच्छी स्थिति नहीं है।

कार्यक्रमके पहले कचरा छिपाया

शहरके बीच में होने के कारण अस्पताल के कमरों की सफाई व्यवस्था ठीक है। सफाई की स्थिति बिल्डिंग के बाहरी हिस्से में ज्यादा खराब है। अस्पताल के पीछे गंदगी का बड़ा ढेर है। दो डस्टबीन होने के बावजूद जहां-तहां कचरा जमा है। मेडिकल वेस्ट को भी जहां-तहां फंेक दिया है।

वाटर टैंक से ओवर फ्लो के बाद पानी यहीं गिरता है। इससे जलजमाव भी है। कचरा सड़ने और जलजमाव की वजह से लगातार दुर्गंध निकलती रहती है। नालियां खुली रहने से भी लगातार बदबू आती है। इससे यहां आने वाले मरीजों को काफी परेशानी होती है। अस्पताल के कर्मियों ने बताया कि मेडिकल वेस्ट और दूसरे प्रकार का कचरा काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ था। कुछ दिनों पहले मंत्री के कार्यक्रम के पहले छिपाने के उद्देश्य से इसे पीछे की ओर धकेल दिया गया।

मेडिकल ऑफिसरों का कहना है कि पीपीपी मोड पर चल रही सफाई व्यवस्था को खत्म किया जाना ठीक नहीं है। स्वास्थ्य समिति को इसे खत्म नहीं करना चाहिए था। पीपीपी मोड को खत्म करने का कारण जेनरेटर का बिल बताया जा रहा है। पीपीपी मोड में साफ-सफाई, केटरिंग और जेनरेटर चलाने की जिम्मेदारी कंपनी की तय की गई था। शहरी इलाकों में बिजली काफी कम कटती है। अधिक से अधिक एक दिन में इसका आधा घंटा उपयोग होता था। इस वजह से स्वास्थ्य समिति ने कंपनियों को सभी शहरी अस्पतालों से जेनरेटर हटा लेने को कहा, लेकिन सफाई कंपनियों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि तीनों में से एक भी सुविधा को लेने से अगर समिति की ओर से मना किया गया तो वे काम नहीं करेंगे। इसके बाद सारे शहरी अस्पतालों से पीपीपी मोड पर सफाई व्यवस्था खत्म कर दी गई।

समिति के जिम्मे सफाई

पीपीपीमोड के खत्म हो जाने के बाद अस्पताल की सफाई रोगी कल्याण समिति की ओर से की जा रही है। इसके अंतर्गत अस्पताल में चार सफाई कर्मी हैं, जो अलग-अलग शिफ्ट में सफाई करते हैं। कर्मियों को यह रकम अस्पताल के व्यावसायिक मद से दी जाती है। एक महीने में प्रति मजदूर 2200 रुपए की राशि देने का प्रावधान है। अधिकारियों का कहना है कि यह रकम ज्यादातर उन्हें अपनी जेब से ही देनी होती है।

कई समस्याएं, शिकायत की है

पीपीपीमोड खत्म कर दिए जाने के कारण साफ-सफाई में काफी समस्या रही है। तीन साल से यह जिम्मा रोगी कल्याण समिति के पास है। कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। इससे सफाई ठीक से नहीं हो पा रही है। पीछे की गंदगी को हटाने के लिए डंपर बुलाया गया था, लेकिन तार के कारण यह आगे नहीं जा सका। पार्क में जलजमाव की समस्या है। इसके बारे में भी भवन निर्माण विभाग से शिकायत की गई है। मंगलवार को निरीक्षण के लिए कर्मी आए थे। डॉ.मनोज कुमार सिन्हा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट

करंट के कारण सफाई नहीं

अस्पतालप्रबंधन के अनुसार पीछे के हिस्से की सफाई के लिए कुछ दिनों पहले नगर निगम के डंपर को बुलाया गया था। इसने कुछ सफाई की था। यहां से बिजली का तार काफी कम ऊंचाई से गुजरता है। इससे डंपर को खतरा था। इस वजह से आगे की सफाई नहीं हो सकी। झाड़ियों को हटाया नहीं जा सका। इस संबंध में बिजली कंपनी को शिकायत की गई थी, लेकिन उन्होंने अब तक तार की ऊंचाई ठीक नहीं की।

दूर से वीआईपी लगने वाले न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में भी कचरा सीवरेज

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