दुनिया अपने स्वार्थ के लिए भुना रही तिब्बत की आजादी : तेनजिंग सुंदई
दुनियातिब्बत की आजादी को अपने-अपने स्वार्थ के रूप में भुना रही है। एक समय जब चीन ने तिब्बत का अधिग्रहण कर लिया था, अमेरिका शरणार्थियों की मदद करता था। पर, जैसे ही तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन चीन गए, अमेरिका ने सहयोग करना बंद कर दिया। भारत जो पड़ोसी देश है, वह पहला राष्ट्र है, जिसने 2003 में साफ कह दिया कि तिब्बत तो चीन का हिस्सा है। जिसको जब फायदा मिलता है तिब्बत को नजरअंदाज करता है। लेकिन भारत के लिए तिब्बत काफी महत्वपूर्ण है। हम चाहते हैं आप हमारी आजादी की लड़ाई में साथ आएं। गुरुवार को एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में भूदान यत्र समिति की ओर से आयोजित संगोष्ठी में कवि, लेखक और तिब्बत स्वातंत्र्य संघर्ष के एक्टिविस्ट तेनजिंग सुंदई ने यह अपील की।
वहीं, डीएन गौतम ने कहा कि तिब्बत से भारत के सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। पर, चीन इसे बिगाड़ने की कोशिश कर रहा। हमें इस साजिश को समझना होगा। एएन कॉलेज के भूगोल के प्रोफेसर देवेंद्र कुमार ने कहा कि तिब्बत की आजादी जितनी तिब्बत के लिए जरूरी है, उतनी ही भारत के लिए भी है। इस दौरान समिति के अध्यक्ष शुभ मूर्ति सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी मौजूद रहे।