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तीन अपाहिज, आलसी और कामचोर दोस्तों की कहानी

5 वर्ष पहले
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आजकी भाग-दौड़ भरी जिंदगी तथा इंटरनेट के जमाने में तीन अपाहिज की पृष्ठभूमि अजीब-सी लगती है, लेकिन इसमें अजीब कुछ भी नहीं हैं। क्योंकि कामचोर, आलसी, लापरवाह एवं झूठे तर्क-कुतर्क और फालतू में अपना और दूसरों का समय बर्बाद करनेवाले हर जमाने में हर तंत्र में पाए जाते हैं। इसी कामचोरी, आलसी और लापरवाही की कहानी को कालिदास रंगालय में नाटक तीन अपाहिज में दिखाया गया। इसके तीन पात्र कल्लू, खल्लू और गल्लू के झूठे तर्क-कुतर्क पर लोग हंसी उड़ाते हैं। तीन अपाहिज विपिन कुमार अग्रवाल लिखित एक हास्य नाटक है। नाटक में ग्रामीण परिवेश को बखूबी दर्शाया गया है।

कल्लू, खल्लू और गल्लू तीनों अव्वल दर्जे का आलसी और कामचोर हैं। वह अपनी गलत बातों को भी सही करने के लिए तर्क करते रहते हैं। उनकी असलियत से गांव वाले वाकिफ हैं। गांव वाले जानते हैं कि तीनों एक नंबर के निकम्मे हैं, लेकिन ये तीनों अपनी ही धुन में लगे रहते हैं। ये लोग कोई काम करते हैं किसी की बात सुनते हैं। हमेशा अपने आप को ही सही मानते हैं। वे अपाहिज के समान जीवन जीते हैं। निर्देशक-संतोष मेहरा, मंच पर- निखिल विद्यार्थी, अजीत कुमार, नंदकिशोर कुमार, राहुल रंजन, खालिद खान।

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