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कार्रवाई नहीं होने के कारण नहीं बदल रही तस्वीर

5 वर्ष पहले
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11 फरवरी के अंक में प्रकाशित

डीबी स्टार ने बुधवार से शुरू किया था देखना। शनिवार तक अलग-अलग समय कब्जे की स्थिति देखी गई। सामने आया कि ज्यादातर बस क्यू शेल्टर पर स्थायी रूप से अस्थायी कब्जा है। आरब्लॉक बस क्यू शेल्टर के पास सुबह सन्नाटा था। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, चहलपहल बढ़ती गई। बर्तन बेचने वालों की दुकान सज गई। थोड़ी दूरी पर दुकान सजने के कारण इससे अधिक परेशानी नहीं थी, लेकिन दोपहर ढलते-ढलते ठीक शेल्टर के नीचे चाय की दुकान सज गई। आसपास ग्राहकों का ऐसा जमावड़ा लग गया कि वह जगह बस शेल्टर लगती ही नहीं थी। रात नौ बजे तक यही स्थिति रही। परिवहन भवन के सामने का बस क्यू शेल्टर दिन में खाली था। उसके एक कोने में कुछ लकड़ियां बर्तन रखे थे। रेलिंग पर कपड़ा फैला था। पांच बजते ही पूरा शेल्टर रसोईघर के रूप में तब्दील हो गया। बगल के फुटपाथ पर रहने वाली चार-पांच महिलाएं वहां लकड़ी का चूल्हा जला कर खाना बनाने लगी। वहीं बगल में दो तीन लड़कियां सिलोटे पर मसाला पीस रही थीं। शाम सात बजे तक हर रोज यही स्थिति दिखी। आयकर गोलंबर पर बने बस क्यू शेल्टर पर दिन भर मूर्ति बेचने वाले काबिज दिखे। चितकोहरा गोलंबर पर बने बस क्यू शेल्टर पर सुबह-सुबह एक नाई अपनी कुर्सी हजामत का सामान लेकर आता दिखा और शाम तक वहां उसका सैलून चलता रहा। अनीसाबाद में एक शेल्टर पर चाय दुकानदार स्थायी रूप से काबिज दिखा जबकि दूसरे के चारों तरफ चार बजते ही सब्जी के ठेले सज गए।

2013

में मॉडर्न बस क्यू शेल्टर के लिए 15 करोड़ की स्वीकृति मिली।



2014

में टेंडर जारी हुआ 208 नए बस क्यू शेल्टर बनने के लिए।



91

बस शेल्टर नहीं बन सके, क्योंकि चिह्नित जगह पर जमीन नहीं थी।

शेल्टर पर कब्जे की पुलिस-प्रशासन को जानकारी नहीं, बुडको को चिंता ही नहीं

पटना }डीबी स्टार

पिछलेदिनों डीबी स्टार ने मौका-मुआयना कर कब्जे की स्थिति देखी और बुडको से पूछा तो कहा गया कि अतिक्रमण के लिए एसएसपी और एसडीओ को काफी पहले पत्र लिखा गया है। गुरुवार को खबर छपने से पहले और उसके बाद लगातार इन दोनों अधिकारियों से जानकारी निकालने की भरसक कोशिश की गई कि ऐसी कोई चिट्‌ठी मिली है या नहीं। अंतत: दोनों का जवाब आया कि बुडको से इस संबंध में कोई पत्र-व्यवहार नहीं हुआ है। एसएसपी और एसडीओ की प्रतिक्रिया पर दोबारा बुडको से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया कि आखिर उनके दावे में कितना दम है तो जवाब नहीं मिला।

पहले दिन खबर लिखे जाने के क्रम में वरीय पुलिस अधीक्षक मनु महाराज और अनुमंडलाधिकारी (सदर) रियाज़ अहमद खान से फौरी तौर पर कुछ स्पष्ट बता पाने में असमर्थता जताई थी। डीबी स्टार में गुरुवार को छपी खबर का हवाला देकर जब उनसे जानकारी लेने की कोशिश की गई तो दोनों अधिकारियों ने अपने-अपने दफ्तर से जानकारी ली, लेकिन ऐसे किसी पत्र-व्यवहार की बात नहीं निकली। एसएसपी मनु महाराज ने शुक्रवार तक कहा कि अगर चिट्‌ठी आई होगी तो कार्रवाई जरूर करेंगे। लेकिन, शनिवार को अंतत: उन्होंने साफ-साफ बता दिया कि उनके कार्यालय में बुडको ने इस तरह की जानकारी कभी नहीं दी है कि मॉडर्न बस क्यू शेल्टर पर कब्जा हो रहा है और उसे हटाने के लिए पुलिस की मदद की दरकार है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मदद की कोई चिट्‌ठी आएगी तो बता भी देंगे और विधि-सम्मत कार्रवाई भी करेंगे। एसडीओ ने भी इस मुद्दे पर साफ-साफ कहा कि बुडको ने कोई सूचना नहीं दी है। कब्जे पर लगातार कार्रवाई कर रहे। बुडको की ओर से आज ऐसी सूचना मिलेगी तो कल खाली करा देंगे।

पुलिस और प्रशासन से मिली प्रतिक्रिया के बाद बुडको से एक बार फिर पक्ष जानने का प्रयास पिछली बार की तरह निरर्थक रहा। बुडको के परियोजना निदेशक सत्येंद्र कुमार सिंह ने इस बार भी सीधे कहा कि वह इस विषय पर कुछ नहीं बोलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आपने जो देखा या आपको जो लगा, आपने लिख ही दिया है। प्रतिक्रिया जैसी कोई बात नहीं। उन्होंने गुरुवार को छपी खबर के संबंध में भी बुधवार को बातचीत होने पर प्रतिक्रिया से इनकार कर दिया था।

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