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‘आयुर्वेद और एलोपैथी चिकित्सा को एक मंच पर लाने की जरूरत’

6 वर्ष पहले
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पटना| आयुर्वेदऔर एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को एक मंच पर लाने की जरूरत है। दोनों साथ मिलकर काम कर सकते हैं। इनकी अलग-अलग विशेषता है जिन्हें समझदारी से एक साथ मिलाकर मरीज के हित में चलाया जा सकता है। ये बातें मंगलवार को राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज कदमकुआं में आयोजित सेटेलाइट सेमिनार सातवां वर्ल्ड आयुर्वेदिक कांग्रेस में मेदांता अस्पताल गुड़गांव से आए डॉ. जी गीथा कृष्णन ने कही। उन्होंने कहा हृदय, फेफड़े, कैंसर आदि की सर्जरी के बाद मरीज आयुर्वेद का उपयोग दर्द से उबरने में कर सकता है। कैंसर के इलाज में एलोपैथी के साथ ही साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता ह।

नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल से आई डॉ. प्रीति छाबड़ा ने आयुर्वेद में अग्नि कर्म इलाज पद्धति के बारे में जानकारी दी। साईटिका, कमर दर्द, कंधे का दर्द, आस्टियो आर्थराइटिस के मरीजों को इस तकनीक की मदद से काफी राहत पहुंचाई जा सकती है। सेमिनार का उद्घाटन राज्य के प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री आलोक मेहता ने किया। उन्होंने कहा आज आयुर्वेद के महत्व को सारी दुनिया मान रही है। यह विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हो रहा है। आयुर्वेद को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि इसे वैज्ञानिक संतुष्टि के साथ दुनिया के सामने रखना होगा।

डॉ. जी गीथा कृष्णन

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