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महादलित आयोग के गठन पर राज्य सरकार से जवाब तलब

5 वर्ष पहले
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सोमवारको पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य महादलित आयोग के गठन की संवैधानिकता को चुनौती देनेवाली रिट याचिका पर राज्य सरकार को दो हफ्ते में जवाब देने का आदेश दिया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने केदार पासवान की याचिका पर महादलित आयोग का गठन करने में राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार एवं शक्तियों पर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता विनोद कुमार कंठ ने बताया कि सूबे की अनुसूचित जाति की फेरहिस्त में से 19 जातियों को महादलित का दर्जा देने और उनके कल्याण के लिए आयोग का गठन ही राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार एवं शक्तियों से बाहर है। संविधान ने यह शक्ति केंद्रीय संसद को दी है, लेकिन इसका उपयोग राज्य सरकार ने किया है।

सरकार का यह कदम 1950 के भारत सरकार के प्रेसिडेंशियल आॅर्डर के भी विरुद्ध है। यही नहीं महादलित वर्ग में 19 अनुसूचित जातियों को भी मनमाने तरीके से डाला गया है। केंद्रीय अनुसूचित जाति आयोग से इस बाबत परामर्श भी नहीं लिया गया, जो कानूनन अनिवार्य होता है। इन सभी कानूनी बिंदु पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (अब सामान्य प्रशासन) के 30 अगस्त, 2007 को लिए गए संकल्प संख्या 2950 को चुनौती दी है, जिसके तहत महादलित आयोग का गठन किया गया। साथ ही सरकार की 30 अप्रैल, 2008 की अधिसूचना को भी निरस्त करने की प्रार्थना की है, जिसके तहत 19 अनुसूचित जातियों को केंद्रीय आयोग से परामर्श लिए बगैर ही महादलित श्रेणी में डाल दिया गया है।

...क्यों नहीं मिली डीजल अनुदान की राशि

भागलपुरजिले में सूखाग्रस्त घोषित इलाकों के किसानों को डीजल अनुदान नहीं दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने सुमन कुमार सिंह की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता के वकील शंकर कुमार ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित इलाकों में सिंचाई के लिए 130 करोड़ रुपए डीजल अनुदान के रूप में दिया पर भागलपुर जिले में कुछ सूखाग्रस्त इलाकों के सैकड़ों किसानों को अनुदान नहीं मिला है। जिला कृषि पदाधिकारी से आग्रह करने पर भी कुछ नहीं हुआ।

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