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सम्राट अशोक के बहाने भाजपा की नजर कुशवाहा समाज पर, पिछड़ों में आधार बढ़ाने की कोशिश

4 वर्ष पहले
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तिहासकेवल समाज को ही नहीं, बल्कि राजनीति को भी प्रभावित करता है। मौजूदा परिप्रेक्ष्य में यह प्रमाणित हो रहा है। सम्राट अशोक को लेकर सूबे में जो राजनीति शुरू हुई है, वह इसी कहानी की पटकथा है। भाजपा ने राष्ट्रवादी कुशवाहा परिषद के माध्यम से सम्राट अशोक की जयंती मनाकर इतिहास के पन्नों को फिर से पलटा है। दरअसल सम्राट अशोक के बहाने भाजपा की नजर सूबे की ताकतवर कुशवाहा जाति पर है। अशोक दुनिया के महानतम शासकों की शीर्ष पंक्ति में हैं। सम्राट अशोक से बिहार के कुशवाहा भावनात्मक रूप से जुड़े हैं और उनके मन में सम्राट के लिए काफी सम्मान है। कुशवाहा जाति उन पर गर्व करती है।

भाजपा की नजर सम्राट अशोक के माध्यम से कुशवाहा जाति पर है। पार्टी के विधानपार्षद सूरजनंदन कुशवाहा, जो कि कुशवाहा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, पिछले दो वर्षों से सम्राट अशोक की जयंती मना रहे हैं। इस कार्यक्रम में बिहार भाजपा के तमाम बड़े नेता और कार्यकर्ता शामिल होते हैं। उनका मानना है कि भाजपा ने ही सबसे पहले सम्राट अशोक को याद किया। उन्हें बिहार के सत्ताधारी दल पूरी तरह भूला चुके थे। यह राज्य के अपने गौरवशाली अतीत को भूलने जैसा है। पार्टी ने वर्ष 2014 में सबसे पहले चंद्रगुप्त मौर्य का राज्यारोहण दिवस मनाया।

इसके बाद जनवरी 2015 में मौर्य यात्रा निकाली। इसी क्रम में मई, 2015 में पहली बार व्यापक स्तर पर राजधानी पटना में सम्राट अशोक की जयंती मनाई। इसमें बिहार सरकार से अशोक जयंती पर छुट्टी घोषित करने और केन्द्र सरकार से सम्राट अशोक पर डाक टिकट जारी करने की मांग की गई। बाद में दोनों ही मांगें स्वीकार हुई। इसी वर्ष 14 अगस्त, 2015 को केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने डाक टिकट भी जारी किया।

भाजपा नेता मौर्य रथ लेकर पूरे राज्य का करेंगे दौरा

भाजपाजानती है कि बिहार में बगैर कुशवाहा जाति के पूर्ण समर्थन के वह नीतीश कुमार की ताकत कम नहीं कर सकती। नीतीश कुमार ने अपनी राजनीति लव-कुश के नाम पर शुरु की थी। कुश की हिस्सेदारी व्यापक रही है। बाद में नीतीश कुमार के सहयोगी उपेन्द्र कुशवाहा के अलग होने से लव-कुश के संबंधों में कड़वाहट आई। आज उपेन्द्र कुशवाहा के साथ भी इस जमात का बड़ा हिस्सा खड़ा हो गया है।

ऐसे में भाजपा ने कुशवाहा जाति में पैठ बनाने के लिए बड़ा कार्यक्रम करने की जरूरत महसूस की और सम्राट अशोक के रुप में उसे ऐसा अवसर भी मिला। हालांकि पार्टी का मानना है कि सम्राट अशोक जयंती मनाने का संबंध राजनीतिक नहीं है। यह सामाजिक मामला है। पर, राजनीतिक विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इसके जरिये भाजपा कुशवाहा को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है। यूपी में कुशवाहा जाति के समर्थन का बड़ा असर पड़ा। बिहार में भी उसे कुशवाहा के सहयोग से ही ऐसी सफलता मिल सकती है।

सूरजनंदन कुशवाहा शीघ्र ही मौर्य रथ लेकर पूरे प्रदेश का भ्रमण करने वाले हैं।

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