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शहाबुद्दीन की रिहाई से राजनीति गरमाई

5 वर्ष पहले
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मरना तो है ही,अब ईश्वर मार दे या फिर शहाबुद्दीन!

बेटों को खोने वाले चंदा बाबू बोले

राजदनेता और पूर्व सांसद शहाबुद्दीन शनिवार सुबह 7.26 बजे भागलपुर जेल से निकले। 11 सालों बाद जेल से निकले नेता की आगवानी के लिए बड़ी संख्या में उनके समर्थक जेल गेट पर मौजूद थे। सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर निकले शहाबुद्दीन ने कहा कि लोगों को मेरा सफेद कपड़ा पसंद है तो उसी में रहेंगे। अगर लोग जींस पहनने को कहेंगे तो वापस वैसा ही करेंगे। हम तो 13 साल से गांव नहीं गए हैं। 11 साल से लोगों से नहीं मिले हैं। फिर भी ये लोगों का प्यार है जो इतनी संख्या में यहां आए हैं। यहां से सौ से ज्यादा गाड़ियों के काफिले के साथ शहाबुद्दीन भागलपुर से सीवान के लिए चले। रास्ते में नारायणपुर हाईवे पर उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मेरे नेता सिर्फ लालू प्रसाद हैं।

भाजपा नेता सुशील मोदी द्वारा उनके केस में सरकार द्वारा ढिलाई बरतने के आरोप पर उन्होंने कहा कि वह मोदी के बयानों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में शहाबुद्दीन ने कहा कि उन्हें फंसाया गया है। यहां से जाने के बाद पत्रकार राजदेव रंजन के परिजनों से भी मिलेंगे। इसके अलावा पटना में लालू प्रसाद से मुलाकात करेंगे। शाम करीब आठ बजे शहाबुद्दीन का काफिला सीवान पहुंचा। शहर में जगह-जगह उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। इसके बाद वे अपने गांव प्रतापपुर गए।

इससे पहले बेगूसराय और मुजफ्फरपुर में भी समर्थकों ने उनका स्वागत किया। दावा किया गया था कि हजार से ज्यादा गाड़ियां उनके काफिले में होंगी। लेकिन बेगूसराय में काफिले में गाड़ियों की संख्या 136 थी। भागलपुर से सीवान के बीच वैशाली में शहाबुद्दीन का लंच ब्रेक हुआ। चिकनौटा चौक पर स्वागत के बाद काबा गांव गए और मो. शेरू के घर खाना खाया।

जेल से निकलते ही बयानों की बौछार|पढ़िए पेज 12

^किस्मत तो मेरी खराब है। मैं शासन से लड़ सका कानून से। मैं अभागा पिता हूं क्योंकि मैं लाचार हूं और जिंदा हूं।

सवाल : आपके जेल से बाहर आने से जंगलराज को बढ़ावा मिलेगा? खून-खराबा नहीं होगा?

जवाब : राजनीतिसे खून खराबा का क्या लेना-देना है। मेरे ऊपर आरोप लगते रहे हैं। मैंने कभी भी इन आरोपों से डीनाय नहीं किया। मीडिया में बात आती रहती है। ताजा आरोप पत्रकार हत्याकांड में लगा। मीडिया में खूब बात आई, लेकिन नतीजा सबके सामने है।

सवाल: आगे आपकी क्या रणनीति होगी, क्या सक्रिय राजनीति में रहेंगे?

जवाब : कौनकहता है कि मैं सक्रिय राजनीति में नहीं हूं। जेल में रहने के बाद भी मैं राजनीति में सक्रिय रहा और आगे भी रहूंगा। पहले भी मैंने सक्रिय राजनीति की है।

सवाल: लालू जी के बच्चे अब राजनीति में गए है? क्या कहेंगे?

जवाब : मुझेइस बारे में पता नहीं है, क्योंकि जब मैं था तो उस समय लालूजी के बच्चे जुवेनाइल थे। अब राजनीति कर रहे हैं तो अच्छी बात है। अखबारों में उनके काम के बारे में पढ़ता रहता हूं कि वे अच्छा कर रहे हैं।

शनिवार को भागलपुर जेल से बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत करते राजद के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन।

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने शहाबुद्दीन के बयान पर कहा कि राज्य में महागठबंधन में राजद, जदयू और कांग्रेस शामिल है। अगर कोई अपने नेता के बारे में बोलता है तो इससे किसी को क्या परेशानी हो सकती है।

उनकी बातों से परेशानी क्यों

लालू ने कहा

बयान के मायने | राजदके 15 वर्षों के शासन में शहाबुद्दीन का राजनीतिक धाक सिर चढ़ कर बोलता रहा। वह विधायक और सांसद बने। उनके पसंदीदा को ही विधानसभा में पार्टी का टिकट मिलता था। राजग शासन में जेल में जाने के बाद भी लालू से शहाबुद्दीन की नजदीकी कम नहीं हुई। शहाबुद्दीन का विरोध करने वालों को पार्टी छोड़नी पड़ी।

पूर्व सांसद ने कहा कि मेरे नेता सिर्फ लालू प्रसाद थे, हैं और रहेंगे। यह पूछने पर कि महागठबंधन के नेता तो नीतीश कुमार हैं, शहाबुद्दीन ने कहा, मैं 27 वर्षों से लालू जी के साथ हूं। जब तक जिंदा रहूंगा, उनके ही साथ रहूंगा। अगर वे नर्क में भी जाएंगे तो साथ जाना मेरी मजबूरी है। मेरी छवि जैसी थी, वैसी ही रहेगी। डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर बोले- वह अभी बच्चा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहाबुद्दीन के बयान पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। शनिवार को जमशेदपुर पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे लिए यह सब बातें महत्वहीन हैं। इस पर प्रतिक्रिया देने या इसे नोटिस लेने की कोई जरूरत नहीं है।

मेरे लिए ये बातें महत्वहीन हैं

नीतीश ने कहा

बयान के मायने | कानूनका राज कायम करने के वायदे के साथ 2005 में सीएम बनने पर नीतीश कुमार ने सीवान में शहाबुद्दीन की धाक समाप्त करने के लिए उन्हें जेल भेजवाने की ठोस पहल के साथ अदालत द्वारा सजा दिलाने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की थी। ऐसे में स्वाभाविक है कि वह नीतीश के हमदर्द नहीं बन सकते।

नीतीश कुमार बिहार के सीएम हैं हमारे मुखिया नहीं। वे परिस्थितियों के मुख्यमंत्री हैं। उनको जनसमर्थन नहीं है। उन्होंने पत्रकार से ही पूछा एक रिपोर्टर के नाते किसको मास लीडर मानते हैं। अकेले तो वे 20 सीट नहीं ले सकते। मेरे नेता नीतीश कभी थे, हैं और रहेंगे। हमारे नेता तो लालू यादव हैं। इस बारे में पूरा देश और राज्य जानता है।

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