पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

गांव को कहीं बसाया, मदरसा कहीं और

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पटनाहाईकोर्ट ने कोसी बाढ़ पुनर्वास के तहत मदरसे को गलत तरीके से स्थानांतरित कर चलाने की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बिहार राज्य मदरसा बोर्ड के सचिव को 23 फरवरी को हाजिर होने का आदेश दिया है। शुक्रवार को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने मो. सिराजुल हक की जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए उक्त आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आयशर मुस्तफा ने कोर्ट को बताया कि 2008 के कोसी बाढ़ पीड़ितों को राज्य सरकार ने नई जगहों पर कानूनी ढंग से बसाया। जो जगह जिला पुनर्वास पदाधिकारी ने चिह्नित की उसपर ही लोगों को बसाना था। याचिकाकर्ता के गांव के सभी परिवारों को नेहुआ बाखर में बसाया गया, जबकि उस गांव का एकमात्र स्कूल जो मदरसा से संचालित था, उसे उसका सचिव मनमाने तरीके से बाखर पश्चिम ले गया। नतीजतन सभी पुनर्वासित परिवारों के बच्चे पढ़ाई से वंचित रह गए।

पुनर्वास अधिकारी के आदेश के विपरीत दूसरी जगह पर मदरसा ले जाकर अपनी निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने की शिकायत मदरसा बोर्ड और राज्य सरकार से याचिकाकर्ता ने बार-बार की। नतीजा सिफर ही रहा। सुनवाई करते वक्त खंडपीठ ने मदरसा बोर्ड से जवाब मांगा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसपर कोर्ट ने बोर्ड की लापरवाही और मामले की अनदेखी करने के लिए सचिव को हाजिर होने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।

दवा आपूर्ति में गड़बड़ी मामले में फैसला सुरक्षित

कार्यकारीमुख्य न्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने डॉ मणिलाल रस्तोगी की जनहित याचिका की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुजफ्फरपुर जिले के सरकारी अस्पतालों में दवा आपूर्ति होते वक्त कुल स्टॉक के 2 प्रतिशत को जांच के लिए रोक कर रखा जाता है और उक्त दवाओं के बैच को सही पाकर ही दवाओं के दामों का भुगतान किया जाता रहा है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

खबरें और भी हैं...