बिहार करता रहा विचार, नवीनगर की बिजली ले गया यूपी
नवीनगरबिजलीघर में ओडिशा और डीवीसी कोटे की बिजली पर बिहार विचार ही करता रहा और यूपी उस बिजली को ले उड़ा। ओडिशा और डीवीसी ने अपने कोटे की 209 मेगावाट बिजली छोड़ दी थी। बिहार के पास उस बिजली को पाने का सुनहला अवसर था, लेकिन निर्णय में विलंब के कारण उसे इस बिजली से हाथ धोना पड़ गया है। हालांकि, बिहार ने उस कोटे की बिजली पर अपना दावा फिर से ठोका है। औरंगाबाद में एनटीपीसी 660 मेगावाट की छह यूनिट बना रहा है। पहले चरण में 1980 मेगावाट का बिजलीघर बन रहा है। इसमें बिहार समेत पांच राज्यों को हिस्सेदारी दी गई है। सबसे बड़ी हिस्सेदारी बिहार की ही है।
बिहार के लिए 1373 मेगावाट का कोटा निर्धारित था। यह पूरी बिजली का 69.36 फीसदी है। पिछले दिनों ओडिशा और डीवीसी ने अपने हिस्से की बिजली सरेंडर कर दिया। इस बिजली पर बिहार का पहला अधिकार बनता था और बिहार को इस संबंध में प्रस्ताव भी मिला था। टैरिफ दर को लेकर बिहार संशय में था। नवीनगर से बिहार को 4.50 रुपए बिजली मिलनी थी। इसी दर पर बिहार अन्य परियोजनाओं और बाजार से भी बिजली लेने जा रहा है। हालांकि, एनटीपीसी के अनुसार नवीनगर की बिजली 3.79 रुपए ही पड़ेगी। बिहार के निर्णय नहीं लेने की दशा में उत्तरप्रदेश को भी बिजली का प्रस्ताव दिया गया और उसने तत्काल उसे स्वीकार कर लिया। उत्तरप्रदेश के ऊर्जा विभाग ने इस विषय पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। इधर, बिहार ने 209 मेगावाट बिजली पर अपना हक जताया है।
बिहार 1372 मेगावाट
डीवीसी 54 मेगावाट
झारखंड 60 मेगावाट
ओड़िशा 155 मेगावाट
प. बंगाल 179 मेगावाट
अनावंटित 148 मेगावाट
शेड्यूलस्टेज-1 (1980 मे.)
यूनिट-1मार्च 2017
यूनिट-2 सितंबर 2017
यूनिट-3 मार्च 2018
बिहार के पास अब भी मौका
बिहारके पास एक अवसर और है। पश्चिम बंगाल ने भी अपनी हिस्सेदारी छोड़ने का निर्णय लिया है। उसे 179 मेगावाट बिजली मिलनी है। बिहार यदि प्रयास करे तो पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी खत्म होने पर यह बिजली उसे मिल सकती है। ऐसे में नवीनगर में उसे 1373 मेगावाट के अलावा 179 मेगावाट बिजली और मिल जाएगी। इस तरह यहां पहले चरण में उसकी हिस्सेदारी 1552 मेगावाट हो जाएगी।
^नवीनगर में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बिहार की ही है। पहली चरण की 70 फीसदी बिजली हमारी है। दूसरे राज्यों को भी इससे बिजली मिले, यह अच्छी बात है। हम आगे भी जरूरत के अनुसार इस बिजलीघर से और बिजली लेंगे। -विजेंद्रप्रसाद यादव, ऊर्जा मंत्री