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बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध के लिए करार

5 वर्ष पहले
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पटना|दक्षिण बिहारकेंद्रीय विवि (सीयूएसबी) ने बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए यूनाइटेड किंग्डम की एस्टोन यूनिवर्सिटी से करार किया है। इसके तहत दोनों विवि में स्टेम सेल थेरेपी, ड्रग डिजाइनिंग थेरेपी, मेंटल हेल्थ थेरेपी आदि पर शोध होंगे। छात्र और अध्यापक नई खोज का आदान-प्रदान भी कर सकेंगे। शुक्रवार को फर्स्ट इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन ह्यूमन इंप्लीकेशन ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया।

बीआईटी ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय कांफ्रेंस शुरू हुआ। मुख्य अतिथि एस्टोन यूनिवर्सिटी के प्रतिकुलपति प्रो. आसिफ अहमद ने रिस्की बिजनेस ऑफ प्रेगनेंसी विषय पर प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने गर्भवती महिलाओं में होनेवाली बीमारी प्री-इक्लेम्पसिया पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रत्येक 50 में से 1 गर्भवती महिला को इसका खतरा रहता है। इसमें शरीर सूज जाता है, जोड़ों में दर्द होता है। इसके इलाज के लिए उनकी टीम काम कर रही है। जल्द दवा विकसित होगी। कुलपति प्रो. हरीशचंद्र सिंह राठौर ने अपील की कि वे कुछ ऐसी दवाएं विकसित करें जिससे रोजमर्रा की जिन्दगी में आम लोगों को फायदा पहुंचे। सीयूएसबी के पीआरओ मो. मुदस्सिर आलम ने बताया कि कांफ्रेंस में मॉलिक्यूलर ऑन्कोलॉजी पर सेशन हुआ। इसमें एसएस हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. जेके सिंह, एसजीपीजीआई लखनऊ के डॉ. एमएम गॉडबोले, दिल्ली विवि की डॉ. तपस्या श्रीवास्तव, किंग अब्दुल अजीज यूनिवर्सिटी से डॉ. फैसल अब्दुल रमन अल्जाहरानी और एम्स पटना से डॉ. मीनाक्षी तिवारी शामिल हुए।

प्रो. आसिफ अहमद

{स्टेम सेल थेरेपी, ड्रग डिजाइनिंग थेरेपी, मेंटल हेल्थ थेरेपी पर होगा काम

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