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किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति एक सप्ताह में, जरूरत होगी पूरी

5 वर्ष पहले
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आईजीआईएमएसको किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति एक सप्ताह में मिल जाएगी। संस्थान को विकसित करने के लिए जो भी जरूरत होगी, वह पूरी की जाएगी। डॉक्टर और कर्मचारी मेहनत ईमानदारी से काम करें, तभी संस्थान को राष्ट्रीय स्तर का बनाया जा सकेगा। स्थापना दिवस पर शपथ लीजिए कि ईमानदारी से काम करेंगे। कोशिश होनी चाहिए कि मरीजों को राज्य के अंदर इलाज की सारी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों। संस्थान में कुछ काम हुआ है, अभी बहुत कुछ करना बाकी है। यह कहना है राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव का। वे आईजीआईएमएस के 32वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह पूछने पर कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इशरत को बिहार की बेटी बताया है, उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने कहा है तो ठीक ही कहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कैंपस में पौधरोपण किया और हेल्थ एग्जिबिशन अन्य विभागों का मुआयना किया।

पटना| समारोहमें मुख्य अतिथि जिपमर पुड्डुचेरी के निदेशक डॉ. एससी परिजा ने कहा कि मेडिकल साइंस में रिसर्च की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार को युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करना चाहिए। नहीं तो वैज्ञानिक बाहर चले जा रहे हैं। देश का ब्रेन विदेश में इस्तेमाल हो रहा है। भारत में बजट का 0.9 फीसदी रिसर्च पर खर्च होता है जबकि अमेरिका में 18, इंग्लैंड में 14 और चीन में आठ फीसदी खर्च किया जाता है। डॉ. परिजा ने इन्फेक्शियस डिजीज प्रजेंट, पास्ट एंड फ्यूचर विषय पर ओरेशन दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने रिसर्च को कैसे बढ़ावा मिलना चाहिए। रिसर्च का कितना महत्व है। एंटीबायोटिक का इस्तेमाल ज्यादा नहीं होना चाहिए। किसी बीमारी की पहचान कैसे की जानी चाहिए। इन्फेक्शन की जांच कैसे हो, आदि पर चर्चा की।

कैंसर सेंटर के लिए 120 करोड़ मंजूर

स्वास्थ्यविभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन के कहा कि पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस को राष्ट्रीय स्तर का बनाया जाए तो यहां के मरीजों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। वह दिन दूर नहीं जब संस्थान एम्स की टक्कर का हो जाएगा। कॉलेज के निर्माण के लिए 590 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। क्षेत्रीय कैंसर सेंटर के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 120 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इसमें राज्य सरकार को 30 करोड़ रुपए देना है। केंद्र ने 33 करोड़ की पहली किस्त दे दी है। राज्य सरकार भी दो से तीन दिन में राशि उपलब्ध करा देगी।

निदेशक डॉ. एनआर विश्वास ने कहा कि संस्थान में आई बैंक, ब्लड बैंक, प्रसूति विभाग, इवनिंग ओपीडी, कैथ लैब, डेंटल क्लिनिक, सभागार कार्यरत हो गया। एमआरआई मशीन के लिए टेंडर हो गया है। नेत्र विभाग में आधुनिक मशीन चुकी है। कार्डियक केयर यूनिट मोबाइल वैन की सेवा शुरू होगी। मरीज के परिजनों के लिए धर्मशाला बनवा रहे हैं। इस दौरान माइक्रोबायोलॉजी के हेड डॉ. एसके शाही, डीन डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह, प्राचार्य डॉ. उदय कुमार, डॉ. हरिहर दीक्षित, डॉ. मनीष मंडल, डॉ. संगीता पंकज मौजूद रहे। शासी निकाय के सदस्य डॉ. सुनील कुमार सिंह ने कहा कि आईजीआईएमएस आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्री इसे राज्य का सबसे अच्छा अस्पताल बनाने की कोशिश में लगे हैं। हम सभी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर इसे पूरा करेंगे।

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