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अपार्टमेंट कल्चर में दादी-नानी के लिए जगह नहीं रहती, इसमें सुधार की जरूरत

5 वर्ष पहले
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गोवाकी राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने कहा कि बुजुर्ग वृद्धाश्रम में खुश नहीं है। वे अपने बच्चों- बहुओं संगे-संबंधियों के साथ रहना चाहते है। लेकिन, आजकल के अपार्टमेंट कल्चर में दादी-नानी को रहने के लिए जगह नहीं है। इसमें सुधार लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दादी-नानी के साथ रहने वाले और उनकी कहानियां सुनने वाले बच्चे संस्कारी होते है। श्यामजी सहाय की लिखित यह पुस्तक तीनों पीढ़ियों को पढ़ने लायक है। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद बचपन, जवानी वृद्धा अवस्था को समझना आसान होगा। शुक्रवार को बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार सेवानिवृत आईएएस श्यामजी सहाय द्वारा लिखित पुस्तक जीवन संध्या के लोकापर्ण के मौके पर उपस्थित लोगों को मृदुला सिन्हा संबोधित कर रही थी।

पद्मश्री डॉ. एसएन आर्या ने कहा कि बुजुर्गों को समझना होगा कि परिवार को सत्ता देने में कोई हर्ज नहीं है। जीवन संध्या पुस्तक को पढ़कर माता-पिता को बच्चों के साथ कैसे रहने की जरूरत है और बच्चों को माता-पिता के साथ कैसे रहने की जरूरत है। लेखक श्यामजी सहाय ने कहा कि बच्चों की तरह बुजुर्ग बेजुबान होते है। उनकी भावनाओं को समझने जरूरत है। 2050 में सत्ता को बुजुर्गों के पास आना होगा। कारण, देश के कुल आबादी का 20 फीसदी आबादी बुजुर्गों की होगी।

250 रुपए कीमत वाली 206 पेज की पुस्तक चार खंडों में विभाजित है। पहले खंड में आलेख, यादों के झरोखे, जीवन दर्शन, पौराणिक कथाएं और सत्य घटनाएं है। दूसरे खंड में दवाएं नुस्खे, तीसरे खंड मेें बुजुर्गों का अधिकार, कानून और चौथे खंड में धर्म-अध्यात्म को समावेश किया गया है। इस मौके पर पूर्व मंत्री डॉ. भीम सिंह, मृदुला सिन्हा के पति रामकृपाल जी, वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र दीक्षित, सेवानिवृत आईएएस राम उपदेश सिंह, पंचम लाल, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल सुलभ आदि मौजूद रहे।

सेवानिवृत्त आईएएस श्यामजी सहाय द्वारा लिखित पुस्तक जीवन संध्या के लोकापर्ण के मौके पर गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा अन्य।

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