परिवार में सभी की भावनाओं को समझें
यहजरूरी नहीं है कि परिवार के सभी सदस्यों की मानसिकता एक जैसी हो इसलिए परिवार को संगठित रखना है तो इसके सभी सदस्यों की भावनाओं को समझना होगा। यह संदेश शुक्रवार को प्रेमचंद रंगशाला में मंचित नाटक दीवार की वापसी ने दिया। इमेज आर्ट सोसाइटी की ओर से प्रस्तुत इस नाटक के लेखक शंभुनाथ सिंह और निर्देशक थे शुभ्रो भट्टाचार्य। नाटक में मनुष्य की खोई हुई खुशियों की वापसी दिखाया गया। नाटक में एक ऐसे विक्षिप्त आदमी की कहानी है जो अपना एक अलग ही संसार रच लेता है और इस संसार को सत्य समझने लगता है। इसी में खुशी तलाशता है जबकि होता है इसके विपरीत। वह दुखों के बीच उलझता ही जाता है। लेकिन एक दिन उसके परिवार के सदस्यों को उसकी अहमियत का एहसास होता है और स्थिति सुधरने लगती हैं। नाटक समाज में लोगों के दोहरे चरित्र को दिखाता है कि किस तरह से लोगों की कथनी और करनी में फर्क है। नाटक कहता है कि हम जिस तरह से एक दूसरे से अलग होते जा रहे हैं उसके कारण मनुष्य बिखरता जा रहा है। यह अकेलापन मनुष्य को विक्षिप्त कर सकता है।